हैदराबाद हवाई अड्डे का परिचालन अधिकार 2068 तक रहेगा जीएमआर के ही पास

हैदराबाद: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (आरजीआईए) के परिचालन के संबंध में जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएचआईएएल) के साथ करार को 30 साल के लिए बढ़ा दिया है।

इस निर्णय के बाद कंपनी 2068 तक इस हवाई अड्डे का परिचालन और रखरखाव करती रहेगी। नए समझौते की अवधि 23 मार्च, 2038 से 22 मार्च, 2068 तक की है।

कंपनी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि 20 दिसंबर, 2004 को हुए समझौते की अवधि में विस्तार किया गया है।

सामरिक रूप से महत्वपूर्ण आरजीआईए ने हैदराबाद शहर को वैश्विक विमानन मानचित्र पर प्रमुखता से उभारा है। यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र की समृद्धि, विकास और चौतरफा आर्थिक विकास में योगदान कर रहा है।

आरजीआईए इस समय दक्षिण और मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा है। यह हवाईअड्डा 31 महीनों में बनकर तैयार हुआ था और इसका उद्घाटन मार्च 2008 में हुआ था।

शुरू में इस हवाईअड्डे पर वार्षिक 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता थी। कारोना वायरस महामारी से पहले 2019 में इसकी क्षमता बढ़ा कर 201 2.1 करोड़ यात्री तक कर दी गयी थी।

कंपनी ने कहा कि है कि इस समय हैदराबाद हवाईअड्डे का बड़े स्तर पर विस्तार किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर यहां से प्रति वर्ष 3.4 करोड़ यात्रियों के आने जाने की सुविधा हो जाएगी। हवाई अड्डे से इस समय सालाना 1.5 लाख टन तक समान ढुलाई की सुविधाएं हैं।

कंपनी की वृहद योजना के तहत हैदाराबाद हवाई अड्डे की क्षमता वार्षिक 10 करोड़ तक यात्री तक की जाएगी।

आरजीआईए भारत का पहला नया हवाई अड्डा है, जिसे सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत बनाया गया है।

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