पंजाब के पटियाला में खालिस्तान के मुद्दे को लेकर दो गुटों में हुई झड़़प

सूत्रों के अनुसार दो समूहों के बीच झड़प काली माता मंदिर के बाहर उस समय हुई जब ‘शिवसेना (बाल ठाकरे)’ नामक एक संगठन के सदस्यों ने ‘खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च’ निकालना शुरू किया। पुलिस ने बताया कि निहंगों सहित कुछ सिख लोगों ने भी इस कार्यक्रम के खिलाफ एक और मार्च निकाला। काली माता मंदिर के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर पथराव करने लगे। स्थिति को और बिगडऩे से रोकने के लिए मंदिर के द्वारों को बंद कर दिया गया। पटियाला के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक राकेश अग्रवाल ने कहा, ‘हमने बाहर से पुलिस बल बुलाया है।’ पुलिस ने दोनों पक्षों के अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है।


इस प्रकरण पर पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि ‘चंद शरारती तत्वों ने कुछ अफवाहें फैलाई थीं।’ बताया गया कि ‘खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च’ का आयोजन ‘शिवसेना (बाल ठाकरे)’ नेता हरीश सिंगला द्वारा किया गया था। सिंगला ने कहा कि ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत पन्नू ने 29 अप्रैल को खालिस्तान के स्थापना दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, ‘उन्हें जवाब देने के लिए सेना ने 29 अप्रैल को ‘खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च’ निकालने का फैसला किया था।’

पटियाला में काली माता मन्दिर पर हुए हमले से पहले अमृतसर में शिव मन्दिर को तोडऩे की घटना से स्पष्ट है कि पंजाब में  हालात को खराब करने के लिए एक योजनाबद्ध तरीके से प्रदेश व देश विरोधी शक्तियां कार्य कर रही है।

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