सत्य का कत्ल कर फैलाया जा रहा है भ्रम, हथुआ महाराज की जमीन पर भू माफियाओं की नजर

डी एन कुशवाहा

मोतिहारी पूर्वी चंपारण- जमीन बेचने के बाद बची हुई जमीन पर विक्रेता का होता है दावा ,इस सत्य को झुठलाने में लगे है भू माफिया।
मोतिहारी।मोतिहारी में इन दिनों गजब का खेल खेलने का प्रयास भू माफिया कर रहे है। प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए गजब का भ्रम फैला रहे है। दशकों पूर्व बन्द होकर नीलाम में बिक्री हो चुके चम्पारण शुगर मिल को आज भी चकिया चीनी मिल बता रहे हैजबकि हकीकत यह है कि बन्द हो चुके चम्पारण शुगर मिल को मोतिहारी के विष्णुकांत गुप्ता ने नीलामी में खरीदा था उसके बाद उसके कल पुर्जे तक को कबाड़ में बेच दिया । चीनी मिल के नाम पर आज बस उसकी टूटी फूटी दीवार ही अस्तित्व में है। यहां से शुरू हुआ भू माफियाओं का खेल । दरअसल चम्पारण शुगर मिल को हथुआ राज के महाराज गोपेश्वर प्रसाद शाही ने 21 मई 1956 में खाता 3 खेसरा 4511 का पार्ट 28 बिगहा 8 कट्ठा 19 धुर रजिस्ट्री किया था जिसका डीड आज भी मोतिहारी के रजिस्ट्री कार्यालय में सुरक्षित है। यानी कि चम्पारण शुगर मिल को जमीन हथुआ महाराज से हासिल हुआ था । चम्पारण शुगर मिल को 28 बिगहा 8 कट्टा 19 धुर जमीन बेचने के बाद हथुआ महाराज की उक्त खाता खेसरा में 14 बिगहा
17 धुर जमीन हथुआ महाराज के पास रह गई।
समय के साथ चम्पारण शुगर मिल बन्द हो गया।जब चीनी मिल बन्द होकर नीलाम हो गया था तो नीलामी के खरीददार विष्णुकांत गुप्ता को भी उक्त खाता खेसरा में 28 बिगहा 8 कट्टा 19 धुर ही जमीन हासिल हुआ है ।नीलामी के पेपर पर विष्णुकान्त गुप्ता का फोटो और हस्ताक्षर भी है । जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है की खाता संख्या 3 खेसरा 4511में नीलामी के विष्णु कांत गुप्ता को 28बीघा 8कट्ठा 19धुर जमीन प्राप्त हुआ अब यही पर भू माफिया खेल खेलने में जुटे हुए है। दरअसल हथुआ महाराज ने जिस खाता 3 खेसरा 4511 में से 28 बिगहा 8 कट्टा 19 धुर जमीन तत्कालीन चम्पारण शुगर मिल को वर्ष 1956 में बेचा था उक्त रकबा में 42 बिगहा 9 कट्टा 16 धुर खतियान में दर्ज है। चीनी मिल को जमीन बेचने के बाद बची हुई अपनी जमीन पर हथुआ महाराज ने पिलरिंग और बाउंडरी करवाया है । इधर कालान्तर में चीनी मिल बन्द हो गया जिसे कबाड़ के भाव मे एक निजी व्यक्ति ने खरीद लिया है। अब यही खरीददार और भू माफिया की जोड़ी हथुआ महाराज की बची हुई जमीन पर अपनी दावा पेश कर रहे है ।

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