सरकार भी सुनें देश के मन की बात : ✍️रजनीश प्रियदर्शी

डी एन कुशवाहा

रक्सौल पूर्वी चंपारण- वर्ष 2014 में जब नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमन्त्री के रूप में सत्ता की बागडोर सम्भाली तो देशवासियों ने बेहद ही उम्मीद भरी नज़रों से उनकी ओर देखा ! कई राजनीतिक पंडितों ने कयास लगाया कि देश का नया निज़ाम आम अवाम की बेहतरी के लिये कुछ नया करने का जज्बा एवम् हौसला रखता है ! मोदीजी की कार्यशैली हमेशा कुछ नया करने का रहा है इस बावत उन्होंने विश्व के कई मुल्कों के दौरों के दौरान लीक से हटकर कार्य किया जिसका सबों ने खुले दिल से स्वागत किया ! देशवासियों से सीधा सम्वाद स्थापित करने के लिये उन्होंने रेडियो के माध्यम से मन की बात कार्यक्रम के जरिये किया जिसे पुरे देश ने विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने खूब सराहा ! प्रधानमंत्रीजी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिये देशहित से जुड़े कई मुद्दों को उठाया तथा उस दिशा में सार्थक प्रयास की दिशा में न केवल सरकार की प्रतिबद्धता दुहरायी बल्कि देशवासियों को भी सरकार के साथ कदमताल कर देश को विश्व के अग्रिम देशों के समक्ष खड़ा करने की दिशा में कार्य करने के लिये आग्रह किया ! निश्चित रूप से बेहद ही सकारात्मक एवम् प्रेरणा से भरा हुआ ऐसे कार्यक्रम होते हैं ! मोदीजी ने इस कार्यक्रम के जरिये देशवासियों से गैस सब्सिडी छोड़ने के लिये आग्रह किया तो असंख्य लोगों ने उनकी पहल पर गैस सब्सिडी छोड़ दी ! किसी भी सरकार की नीति ,रणनीति एवम् कार्यप्रणाली से देश के नागरिकों को लाभ एवम् हानि होती है ! चुनाव के दौरान मतदाताओं से वादों की झड़ी लग जाती है ! आम जनता की दशा सुधारने की दिशा में ठोस पहल का आश्वासन मिलता है लेकिन चुनाव पहले वादे हज़ार चुनाव बाद सब बेकार साबित होते हैं ! इस वर्ष आजादी की 75वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है तथा इसके मद्देनजर कई कार्यक्रम भी देश भर में आयोजित किये जा रहे हैं ! आजादी के 75 साल बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना का समुचित विकास को और अधिक गति देने की जरूरत है ! देश में आज भी बहुत बड़ी आबादी को दो जून की रोटी मयस्सर नहीं है यह कटु सत्य है ! साल 2021 के चन्द दिन के चन्द घंटे शेष हैं , हमारे देश में कई लोग नये साल के जश्न में डूब जायेंगे तथा लज़ीज़ एवम् स्वादिष्ट पकवानों का लुफ्त उठाएंगे ! विडम्बना देखिये इसी देश में नववर्ष में कई साधनहीन लोग कूड़ों एवम् कचरों से अपनी रोटी की जुगाड़ करने की जुगत में रहेंगे ! भले हम विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं लेकिन दुर्भाग्यवश यहाँ हर बात पर सियासत की रोटी सेंकी जाती है ! संसद का कीमती समय हंगामे के भेंट चढ़ जाता है ! जनहित से जुड़े कई बिल सियासी लड़ाई में अधर में लटक जाता है ! आज हमारे हुक्मरानों को इस बात का जवाब देना पड़ेगा कि वे कब तक सत्ता सुख के लिये आम आदमी के हितों की बलि लेते रहेंगे ! आज इस देश की बड़ी आबादी जो गरीबी के साये में जीती है उनके भी मन की बात , दिल की बात को हमारे राजनेताओं को शिद्दत से सुननी चाहिये ! आर्थिक रूप से कमजोर माँ -बाप का सपना जो अपने बच्चों के लिये संजोये हैं वो दम न तोड़े , इसके बारे में गम्भीर रूप से चिंतन करने की जरूरत है ! 135 करोड़ देशवासी यही चाहते है कि देश में अमन ,खुशिहाली एवम् तरक्की हो साथ ही उस तरक्की का फायदा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हर व्यक्ति को मिले ! कानून का राज़ स्थापित हो ! राजनीति में शुचिता एवम् पारदर्शिता हो ! दागी ,सजायाफ्ता एवम् असामाजिक तत्व चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन पाये साथ ही ऐसे तत्वों को निपटने के लिये सरकार नया विधेयक लाये जिससे राजनीति की गरिमा बनी रहे ! सरकारी महकमों में व्याप्त भ्र्ष्टाचार से आम आदमी त्रष्ट है , बगैर सुविधा शुल्क के फाइलें नहीं सरकती हैं ऐसी व्यवस्था को बदलने के लिये सख्त कार्रवाई की जरुरत है ! केन्द्र एवम् राज्य सरकार की योजनायें जिसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पाता है ,चन्द लोगों के बीच जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई का बंदरबाट हो जाता है ! देश में ऐसी व्यवस्था को बदलने की जरूरत है ! राजनीति में सच्चे, अच्छे एवम् जनसेवा से जुड़े लोग आये तभी आज की राजनीति का चाल , चरित्र एवम् चेहरा बदल सकता है ! आज राजनीति में लोग सत्ता सुख भोगने साथ ही अपने परिजनों की किस्मत सवांरने के ख्याल से आते हैं , समाज सेवा से उनका दूर-दूर से कोई नाता -रिश्ता नहीं होता बल्कि उनका व्यवहार एक सामंती सोच का रहता है जो उनके आचार, व्यवहार में झलकता है ! आज आम आदमी दो जून की रोटी के लिये जद्दोजहद करता है , हाड़ तोड़ मेहनत करता है लेकिन कमरतोड़ महँगाई के कारण उसकी थाली से कई पौष्टिक आहार नदारद हो गये हैं ! आज जरुरत इस बात की हमारे सियासतदां अपने वादों पर खरे उतरे तथा समाज के हर तबके विशेष कर अंतिम पायदान पर खडे़ एक-एक व्यक्ति की आँखों से अश्रुप्रवाह को रोकने के लिये कटिबद्ध हों !
अगर हम भारत की तुलना विश्व के विकसित देशों से तुलना करते हैं तो हम पाते हैं कि भारत को उनके समक्ष पहुँचने में कई वर्ष लग जायेंगें ! शिक्षा, स्वास्थ्य , आधारभूतसंरचना को बेहतर करने के लिये बेहतर सोच एवम् संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा ! नागरिक सुविधा बढ़ाये तथा जनहित से जुड़े तमाम प्रणाली को आमजन के लिये सरल बनाएं जिससे न केवल सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी बल्कि विकास की रफ़्तार भी तीव्र होगी ! इसी वर्ष सम्पन्न लोकसभा चुनाव में एक बार फिर प्रचण्ड बहुमत के साथ एनडीए सरकार मोदी जी के नेतृत्व में दूसरी बार सत्ता सँभाली ! साल 2019 में 6 महीने के भीतर मोदी सरकार ने धारा 370 एवं 35A हटाकर कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा को समाप्त कर केन्द्र शासित प्रदेश का गठन करक साहसिक फैसला किया ! मोदी सरकार के लिए सबसे राहत भरा फैसला तब आया जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राममंदिर से संबंधित मुकदमा का न्यायसंगत फैसला सुनाकर सैकड़ों वर्षों से लम्बित मामले का निपटारा किया ! सबसे ज्यादा बवाल तब मचा जब मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून जो पाकिस्तान , बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में प्रताडि़त अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए लेकर आया ! देशभर के कई हिस्सों में इसके विरोध में धरना , प्रदर्शन एवं हिंसक प्रदर्शन से अराजकता की स्थिति उत्पन्न हुई साथ ही सरकारी एवं निजी सम्पत्तियों को भारी नुकसान भी पहुँचा! संसद में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर भी चर्चा हुई तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लेकर देश भर में भ्रम , भय एवं संशय की स्थिति पैदा हुई ! हालांकि मोदी सरकार के सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में प्रेस वार्ता के माध्यम से CAA ,NPR एवं NRC के बारे में विस्तार से भ्रम एवं संशय को दूर करने की कोशिश की लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली ! कृषि सुधार कानून के विरोध में पिछले एक वर्ष से किसान सड़कों पर थे तथा इस आन्दोलन के कारण जन-धन का खासा नुकसान भी हुआ ! अंततः सरकार को कृषि कानून को वापस की घोषणा करनी पड़ी फलस्वरूप किसान आन्दोलन समाप्त हुआ ! हालांकि किसान नेताओं को अभी भी
कई मुद्दों पर जिच है तथा इस को लेकर सरकार एवं इन नेताओं के बीच संवाद स्थापित होने की पहल शुरू हो गयी है ! सरकार को ऐसी स्थिति से उबरने की जरुरत है तथा जो विधेयक सदन के पटल पर आये उस पर सार्थक एवं ईमानदारी पूर्वक चर्चा तथा सभी विश्वास में लेकर कृषि सुधार विधेयक हो या अन्य विधेयक को लागू करने पर सरकार को मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी !
वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण साल 2020 एवं इस वर्ष भी देश खासा प्रभावित हुआ ! स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियां भी उजागर हुई ! अभी कोरोना के नये वेरिएंट अॉमिक्रान को लेकर देश की चिंता बढ़ रही है ! संक्रमितों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा देश को सही सूचना एवं गाइडलाइंस मिले उस पर युद्ध-स्तर पर कार्य करने की जरूरत है ! देश में तमाम पार्टियां जो वर्तमान सरकार की नीतियों एवं कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं उन्हें भी नहीं अपने सियासी फायदे के लिए ऐसी राजनीति से परहेज करना चाहिए जिससे देश की एकता , अखंडता एवं एकता पर चोट पहुँचती हो ! राष्ट्र सर्वोपरि है ! राष्ट्र धर्म से बडा़ कोई धर्म नहींं , इस बात की गाँठ देश के हर नागरिक को बाँध लेनी चाहिए ! संविधान के प्रस्तावना में यह स्पष्ट है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है तथा यहाँ सभी पंथ , मजह़ब एवं धर्म के सभी लोग को धार्मिक आजादी है ! लेकिन धर्म की आजादी एवं अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकता कोई भी सरकार बरदाश्त नहींं कर सकती है ! सरकार देश को हर दृष्टिकोण से सक्षम , सुरक्षित एवं सुदृढ़ करना चाहिए , यह उनका दायित्व है बशर्ते इससे देश के किसी भी नागरिक के अंदर असुरक्षा अथवा भय का माहौल पैदा न हो !
वर्तमान सरकार को बढ़ती बेरोजगारी , बढ़ती मँहगाई , गिरती अर्थव्यवस्था एवं अन्य तमाम कई ज्वलंत मुद्दे परेशानी के सबब बने हुए हैं ! सरकार ने पाँच ट्रिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा का भंडार का लक्ष्य रखा है ! सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में भारत यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेगा ! लेकिन इस पर भी अर्थशास्त्रियों की अलग-अलग राय है !
नववर्ष 2022 में हम सभी देशवासी यही उम्मीद करते हैं कि देश का सूरतेहाल बदलेगा ! भारत की गंगा जमुना तहजीब एवम् अनेकता में एकता जो भारत की विशिष्ट पहचान है वो अक्षुण्ण रहेगा ! देश न्याय के साथ विकास की राह पर अग्रसर होगा !

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