रामगढ़वा प्रखंड अंतर्गत धनहर दिहुली के जनप्रतिनिधियों से भलुवहिंया गांव मांगे न्याय

आजादी के 74 साल बीत जाने के बाद भी नहीं बदली भलुवहिंया गांव के सड़क की सूरत

भलुवहिंया के ग्रामीणों से अपील गांव के विकास के दुश्मन को न दें अपना अनमोल मत: उदय भान कुशवाहा
क्राइम फ्लैश न्यूज

डी एन कुशवाहा

रामगढ़वा पूर्वी चंपारण-स्थानीय प्रखंड अंतर्गत धनहर दिहुली पंचायत के भलुवहिंया गांव के ग्रामीण आजादी के 74 साल बीत जाने के बाद भी सड़क एवं नाला के अभाव में नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। वजह यह है कि धनहर दिहुली पंचायत में कई दशकों से कई जनप्रतिनिधि जीतते आ रहे हैं। लेकिन जीतने के बाद वे ग्रामवासियों की समस्या एवं इस गांव के विकास की बात कूड़ेदान में डाल देते हैं। ऐसे बदनियत वाले जीते हुए प्रतिनिधि यहां के ग्रामीणों की कमजोरियों को भली-भांति समझ चुके हैं। इस गांव का विकास क्यों करना है, सिर्फ कागज में ही यहां का विकास दिखाकर एवं फंड उठाकर अपना पॉकेट गरम कर लेना है। उक्त बातें भलुवहिंया गांव निवासी उदय भान कुशवाहा ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि ऐसे जीते हुए जनप्रतिनिधि चुनाव के समय में पैसे खर्च करके यहां के लालची प्रवृत्ति के कुछ लोगों को खरीद लेते हैं और उन्हीं लोगों के माध्यम से ग्रामवासियों के अनमोल मतों का भी सौदा कर लेते हैं। श्री कुशवाहा ने कहा की ऐसे जन प्रतिनिधियों के द्वारा 2021 के पंचायत चुनाव में भी पैसे के बल पर यहां के भोले-भाले लोगों को बरगलाने का प्रयास करने की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने भलुवहिंया के ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि
जरा इन तस्वीरों को ध्यान से देखिए और अपने सोये हुए जमीर को जगाईए | क्या अब भी आप उसी व्यक्ति को वोट देना चाहते हैं जिसने कई सालों में इस गांव के लिए एक रुपया का भी काम नहीं किया है ? क्या आप उसी व्यक्ति को वोट देना चाहते हैं जिसकी सोच शायद यह है कि हम भलुवहिया गाँव में काम नहीं कराएंगे, क्योकि भलुवहिंया के लोग मुझे वोट नहीं देते हैं | क्या आप उसी व्यक्ति को वोट देना चाहते हैं जिसकी सोच शायद यह है कि हम भलुवहिया गाँव में काम नहीं कराएंगे क्योकि वोट के समय भलुवहिया गाँव के लोग 200 – 200 रुपये में वोट तो दे ही देते हैं | अगर यह सच है तो धिक्कार है आप लोगों को | सच में आप लोगों की आत्मा मर चुकी है और आप लोग बिकाऊ हो चुके हैं।जरा सोचिए जीता हुआ जनप्रतिनिधि आपका शुभचिंतक रहता तो भलुवहिया गांव की सड़क इतनी जर्जर होती! पिछले बरसात के समय विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।फिर भी इस गांव में सड़क नही बनी। आप अपनी बहू बेटियों की उस कष्ट को याद कीजिए, अपने कष्ट को याद कीजिए ,दो चक्का चार चक्का चलने की बात तो दूर, पैदल चलना भी नामुमकिन था इस गांव में। ऐसे जनप्रतिनिधि को यदि अपना मतदान करते हैं तो फिर वही दिन आना तय है। अंत में उन्होंने मतदाताओं से करबद्ध प्रार्थना करते हुए कहा कि 2 दिन 4 दिन कोई दारू पिला दे, कुछ पैसे दे दे तो उससे सारी जिंदगी आपकी कटने वाले नहीं है। इसलिए सोच समझकर बिना लालच के किसी विकास पुरुष को अपना वोट दीजिए। ताकि आपके गांव के सड़क एवं नाले की सूरत बदल सके |

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