मुरौल प्रखण्ड के बूढ़ी गंडक के पिल्लखी घाट पर रिवर रैचिंग प्रोग्राम का होगा आयोजन।

राजीव रंजन की रिपोर्ट

नदी में मछली पालन को समृद्ध किया जा सके इस हेतु बूढ़ी गंडक नदी में स्थानीय कतला, रोहू,एवं मृगल के उन्नत बीजों को नदी में डाला जाएगा।

मछुआरों के आर्थिक संरक्षण एवं सामाजिक उत्थान को देखते हुए प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत रिवर रैचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।

रिवर रैचिंग कार्यक्रम के क्रियान्वयन से नदियों के प्रति किलोमीटर मत्स्य उत्पादन में अभिवृद्धि होगी एवं मछुआरों का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान भी होगा ।साथ ही नदियों में स्थानीय मछलियों के प्रजातियों का जैव -विविधता में संतुलन एवं संरक्षण भी किया जाएगा।

27 अक्टूबर 2021 को बूढ़ी गंडक के पिल्लखी घाट पर रिवर रैचिंग प्रोग्राम का उद्घाटन 9:00 बजे पूर्वाहन में किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम का आयोजन जिला मत्स्य कार्यालय के तत्वाधान में किया जा रहा है। बताया गया कि प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत रिवर रैचिंग प्रोग्राम के तहत मुजफ्फरपुर जिले के बूढ़ी गंडक नदी में स्थानीय कतला ,रोहू एवं मृगल के उन्नत बीजों को नदी में डाला जाएगा ताकि उक्त नदी में मछली पालन को समृद्ध किया जा सके। इस हेतु ही उक्त कार्यक्रम का आयोजन 27 तारीख बूढ़ी गंडक के पिलखी घाट पर किया जाएगा।

इस संबंध में जिला मत्स्य पदाधिकारी डॉ० नूतन ने बताया कि मछुआरों के आर्थिक संरक्षण एवं सामाजिक उत्थान को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत रिवर रैचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि रिवर रैचिंग कार्यक्रम के क्रियान्वयन से नदियों के प्रति किलोमीटर मत्स्य उत्पादन में अभिवृद्धि होगी एवं मछुआरों का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान भी होगा। कहा कि मत्स्य शिकार माही के प्रतिषेध महीनों में मछुआरों को वित्तीय राहत पहुंचाने हेतु राहत -सह- बचत योजना के तहत आच्छादित किया जाएगा। जिला मत्स्य कार्यालय द्वारा जानकारी दी गई कि रिवर रैचिंग कार्यक्रम के कार्यान्वयन से गंगा,गंडक एवं बूढ़ी गंडक नदियों के स्थानीय मछलियों के प्रजातियों का जैव- विविधता में संतुलन एवं संरक्षण किया जाएगा ।साथ ही मत्स्य शिकारमाही पर आश्रित मछुआरों के वार्षिक आय में अभिवृद्धि के साथ जीविकोपार्जन को भी बढ़ावा मिलेगा।जिला मत्स्य कार्यालय मुजफ्फरपुर के द्वारा बताया गया कि रिवर रैचिंग एवं विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इस संबंध में विभिन्न माध्यमों से जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है। जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि 15 जून से 15 अगस्त तक मछली के ब्रीडिंग अवधि रहने के कारण मत्स्य शिकारमाही के रोकथाम हेतु मत्स्य कृषकों को जागरूक करने के साथ ही इस अवधि में शिकारमाही से भविष्य में होने वाले नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

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