भूकंप की भविष्यवाणी करने वाले शिक्षक उमेश कुमार वर्मा ने अगले 72 घंटों के लिए भूकम्प पूर्वानुमान की जानकारी दी।

राजीव रंजन की रिपोर्ट

विगत 20 वर्षों से भविष्य भूकम्प पूर्वानुमान पर अपने विशेष वैज्ञानिक विधि से शोध करने वाले नगर के एमजेके कन्या इंटर कॉलेज के शिक्षक उमेश कुमार वर्मा ने एक बार फिर 72 घंटे के भीतर आने वाले भूकंप की भविष्यवाणी की है। उमेश कुमार वर्मा द्वारा 12 वर्षों से लगातार भूकंप का पूर्वानुमान घोषित किया जा रहा है और जिसमें 75 से 100% तक सफलता मिली है।
उन्होंने बताया कि पूर्वानुमान व आशंका है कि अगले 72 घन्टे मे उ पू गोलार्ध में 22अक्टूबर तक,और केन्द्रीय अमेरिका व प्रशांत क्षेत्र में 5-6 की तीव्रता का भूकंप ,48 घंटे के बाद 6+एम रिक्टर पैमाने पर जापान व अलास्का में भूकम्प आने की सम्भावना जताई जा रही है।72 घंटे बाद भारत , भारत -वर्मा एवं बांग्लादेश बॉर्डर पर 6 से 7: तक की भूकम्प आने की उम्मीद की जा सकती है। 96 घंटे बाद उत्तर पूर्व और उत्तरी गोलार्ध में साइबेरियन रीजन में 6से 7 तिब्रता तक के भूकम्प आने की संभावना है।उन्होने कहा कि यह सारे पूर्वानुमान स्ट्रेस को तब तक ब्रेक करने में कामयाब होंगे जब तक पूर्व के पूर्वानुमान असफल रहते हैं !कहने का मतलब है सभी पूर्वानुमान बाद वाले वाले पूर्वानुमान को सफल बनाते हैं स्ट्रेस के रेस्टोरेशन व उनके भंडारण से यह बाते आम लोगो को सिर्फ सतर्क और सुरक्षात्मक और उचित उठाने के लिहाज से है। सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा होती है इसलिए कोई भयभीत होने की बात नहीं है। यह शोध परक एक प्रायोगिक बातें है। एस्ट्रो जियोफिजिकल मॉडल के आधार पर एवं डाटा एनालिसिस के आधार पर सूचना एकत्रित हुई है! इसको हम लोग तब तक कंफर्म नहीं मानते जब तक कि वहां के लोकल डाटा सफल ना हो।
गौरतलब हो कि पिछले माह उमेश कुमार वर्मा द्वारा किए गए पूर्वानुमान शत प्रतिशत सफल हुआ था कई जगहों के अलावा उन्होंने पाकिस्तान में भूकंप की संभावना व्यक्त की थी। वहां निर्धारित समय पर भूकंप आया। अगर विश्व स्तर पर उस पूर्वानुमान को प्रसारित किया गया रहता और वहां के लोगों ने उस पूर्वानुमान को माना होता है तो जो जानमाल की क्षति हुई है वह क्षति नहीं हुई रहती।
सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है अभावग्रस्त जीवन जीते हुए उमेश कुमार वर्मा अध्यात्म आधारित वैज्ञानिक शोध एवं शक्ति से भूकंप के पूर्वानुमान एवं भविष्यवाणी करने हेतु जो जानकारी प्राप्त करने में सफलता पाई है, उसे अभी भी विश्व के वैज्ञानिक नजरअंदाज कर कर रहे हैं।

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