मोतिहारी: RTI कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल हत्याकांड का जल्द होगा उद्भेदन, एसपी ने किया दावा

पूर्वी चंपारण से डीएन कुशवाहा की रिपोर्ट

   मोतिहारी में आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल हत्याकांड की जांच को लेकर एसपी नवीन चंद्र झा हरसिद्धि पहुंचे. शनिवार देर रात तक एसपी ने घटनास्थल का मुआयना और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से अब तक हुई जांच की जानकारी. इस दौरान उन्होंने जल्द ही विपिन हत्याकांड के उद्भेदन करने की दावा किया.
एसपी ने घटनास्थल का मुआयना किया. साथ ही एसपी ने हरसिद्धि थाना में लगभग चार घंटे तक विपिन हत्याकांड के मामले में अरेराज डीएसपी अभिनव धिमन समेत स्थानीय पुलिस अधिकारियों से अब तक हुई जांच की जानकारी ली. देर रात तक इस हत्याकांड की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद एसपी ने पुलिस अधिकारियों को कई निर्देश दिया. एसपी ने बताया कि घटना के हर पहलू पर जांच किया जा रहा है. जल्द हीं विपिन हत्याकांड का उद्भेदन कर दिया जाएगा।

विपिन अग्रवाल हत्याकांड की जांच को लेकर एसपी नवीन चंद्र झा ने हरसिद्धि थाना में लगभग चार घंटे तक समीक्षा की. उन्होंने मामले में अब की प्रगति के बारे में अरेराज डीएसपी अभिनव धिमन समेत स्थानीय पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली. एसपी ने बताया कि विपिन के पिता ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. एसपी ने बताया कि विपिन अग्रवाल हत्याकांड की जांच के लिए अरेराज डीएसपी अभिनव धिमन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है.एसपी ने बताया कि विपिन अग्रवाल आरटीआई एक्टिविस्ट थे. और विपिन के कारण कई लोगों को नुकसान हुआ है. उन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. जल्द ही विपिन हत्याकांड का उद्भेदन कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि मृतक के घर पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है.ज्ञात हो कि जिला के हरसिद्धि थाना क्षेत्र में बाइक सवार अपराधियों ने शुक्रवार की दोपहर में आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या कर दी थी. प्रखंड कार्यालय के पास गोलियों से भून कर उनकी हत्या की गई थी. विपिन को चार गोलियां लगी थी. गोली मारने के बाद अपराधी फायरिंग करते हुए भाग गये थे.घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जख्मी विपिन अग्रवाल को इलाज के लिए स्थानीय पीएचसी में भर्ती कराया, जहां से विपिन को सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. सदर अस्पताल लाने के क्रम में विपिन की मौत हो गई थी. इसके बाद से आरटीआई कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों आदि की ओर से पुलिस पर दबाव है.

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