“काज किए बिना जो जन पाए, वह खाना ही उसको खाए।”

“बिना किए जो पाना चाहे, उसके पीछे दु:ख धावे” : ठाकुर अनुकूल चंद्र जी

डी एन कुशवाहा

रामगढ़वा पूर्वी चंपारण– सत्संग नेपाल बीरगंज द्वारा सह प्रति ऋत्विक अशोक कुमार चौरसिया दादा के नेतृत्व में आयोजित ऑनलाइन सत्संग को संबोधित करते हुए रामगढ़वा के स्वस्त्ययनी व्रतधारी, संगीतज्ञ व सीता सावित्री म्यूजिकल इंस्टिट्यूट रामगढ़वा के निदेशक संजय कुमार दास ने ठाकुर जी की अमृत वाणियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घोर पाप से युक्त कलियुग में अमानुष बने मानुष को पुनः मानुष बनाने एवं हम मानवों के कल्याण के लिए इस धरा धाम पर आए ठाकुर अनुकूल चंद्र जी आए हैं।वे हमें हिदायत करते हुए कहते हैं कि –
“अर्थ, मान, यश इत्यादि पाने की आशा में मुझे ठाकुर बनाकर भक्त मत बनो। सावधान हो जाओ! ठगे जाओगे। तुम्हारा ठाकुरत्व न जगने पर तुम्हारा कोई केंद्र भी नहीं, ठाकुर भी नहीं। धोखा देने पर, धोखे में पड़ोगे।”
उक्त पक्तियों के माध्यम से ठाकुर जी हमें कहते हैं कि अपने अंदर ठाकुरत्व को जगाओ। उनमें दो विशेष गुण हैं, जो हर मनुष्य से उन्हें अलग करते हैं, वह है infinite love and absolute knowledge(अनंत प्रेम के भंडार और अखंड ज्ञान के भंडार)। ठाकुर जी कहते हैं इन दोनों का अधिकारी बनो, अपने अंदर जागृत करो। अर्थात हमें ठाकुर जी हर तरह से योग्य बनाना चाहते हैं। जब हम योग्य बन जाएंगे और हर तरह से कुशल हो जाएंगे तो हमारे पास आपसे आप अर्थ, मान, यश इत्यादि की प्राप्ति होगी। अगर हम हर तरह से योग्य नहीं बनेंगे तो हम कदम कदम पर दूसरे से ठगे जाएंगे। इसलिए ठाकुर जी एक जगह कहते हैं –
“योग्यता नहीं दाबी करे, दुर्गति में हुए मरे।”
जिसके पास योग्यता नहीं रहता है, वह अगर किसी चीज पर दाबी करता है, उसे दुर्गति भोगना पड़ता है। जो लोग अपने आप को ठगते हैं, उसे जीवन भर आंसू बहाना पड़ता है। भगवान भी उसी को मदद करते हैं, जो अपना मदद खुद करते हैं। इसलिए ठाकुर जी कहते हैं “करना ही पाने की जननी है।”उन्होंने कहा है कि “काज किए बिना जो जन पाए, वह खाना ही उसको खाए।” वे कहते हैं “बिना किए अर्थ, मान, यश इत्यादि पाने की आशा में मुझे ठाकुर बनाकर भक्त मत बनो। सावधान हो जाओ। ठगे जाओगे। तुम्हारा ठाकुरत्व न जगने पर कोई तुम्हारा केंद्र भी नहीं, ठाकुर भी नहीं। धोखा देने पर, धोखे में पड़ोगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed