आंख की निकट दृष्टि दोष के प्रमुख कारणों में अनुवांशिक, पर्यावर्णीय स्थितियां और जीवनशैली इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है: डॉ अमर क्याल

डी एन कुशवाहा

रक्सौल पूर्वी चंपारण- आंखों की समस्या के संबंध में बीरगंज रजत जयंती चौक स्थित किरण आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉक्टर अमर प्यार ने बताया कि यह समस्या सबसे पहले परिवार में अनुवांशिक चलता है। अगर आपके माता या पिता दोनों में से किसी को यह समस्या है तो आपके लिए इसका खतरा बढ़ जाता है। अगर माता-पिता दोनों को निकट दृष्टि दोष है तो खतरा अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि स्क्रीन (टीवी, कम्प्युटर, मोबाइल) के सामने अधिक समय बिताना।
किताबों या स्क्रीन से आवश्यक दूरी न रखना भी मायोपिया के खतरे को अधिक बढ़ा देता है।
कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि प्रकृतिक रोशनी में कम समय बिताने से मायोपिया का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि इन लक्षणों से पहचानें मायोपिया का सबसे प्रमुख लक्षण है दूर की चीजें स्पष्ट दिखाई न देना, इसके अलावा निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं;

बार-बार आंखे झपकाना।
दूर की चीजें देखने पर आंखों में तनाव और थकान महसूस होना।
ड्रायविंग करने में परेशानी आना खासकर रात के समय में।
सिरदर्द।
पलकों को सिकुड़कर देखना।
आंखों से पानी आना।
उन्होंने कहा कि बच्चों में इनके अलावा निम्न लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं –

क्लासरूम में ब्लैक बोर्ड या व्हाइट बोर्ड से ठीक प्रकार से दिखाई न देना।
लगातार आंखें मसलना।
पढ़ाई पर फोकस न कर पाना।

इसके उपचार के संबंध में उन्होंने बताया कि उपचार का उद्देश्य दृष्टि को सुधारना होता है। इसके लिए सर्जिकल और नान सर्जिकल दोनों तरह के उपचार यहां किरण आई हॉस्पिटल में उपलब्ध हैं।

नान-सर्जिकल मायोपिया के नान-सर्जिकल उपचार में नेगेटिव नंबर के चश्मे या कांटेक्ट लेंसों की आवश्यकता पड़ती है। जितना नंबर अधिक होगा उतना ही आपका मायोपिया गंभीर है।

चश्में की विशेषता के संबंध में उन्होंने बताया कि
यह दृष्टि को स्पष्ट और तेज करने का एक सामान्य और सुरक्षित तरीका है। इनमें जो आई ग्लास लेंस इस्तेमाल किए जाते हैं वो कईं प्रकार के होते हैं जैसे सिंगल विज़न, बाइ-फोकल्स, ट्राय-फोकल्स और प्रोग्रेसिव मल्टी-फोकल।

कांटेक्ट लेंसेस के संबंध में उन्होंने बताया कि

यह लेंस सीधे आंखों पर लगाए जाते हैं। ये विभिन्न प्रकार के पदार्थों से बने होते हैं और इनकी डिजाइनें भी अलग-अलग होती हैं, जिनमें सम्मिलित हैं मुलायम और कठोर, टोरिक और मल्टी-फोकल डिजाइन्स।

रिफ्रेक्टिव सर्जरी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि
मायोपिया को रिफ्रेक्टिव इरर कहते हैं, इसलिए इसे दूर करने के लिए की जाने वाली सर्जरी को रिफ्रेक्टिव सर्जरी कहते हैं। रिफ्रेक्टिव सर्जरी, चश्मों और कांटेक्ट लेंसों पर निर्भरता कम कर देती है। इसमें आई सर्जन कार्निया को पुनः आकार देने के लिए लेज़र बीम का इस्तेमाल करता है। इससे निकट दृष्टि दोष में काफी सुधार आ जाता है। कईं लोगों को सर्जरी के बाद चश्मे या कांटेक्ट लेंसों की जरूरत नहीं पड़ती है, जबकि कईं लोगों को इनकी जरूरत पड़ सकती है। रिफ्रेक्टिव सर्जरी की सलाह तब तक नहीं दी जाती जब तक कि आपके लेंस का नंबर स्थिर नहीं हो जाता है। आगे उन्होंने बताया कि लेसिक और फोटो-रिफ्रेक्टिव केरैटेक्टोमी (पीआरके) सबसे सामान्य रिफ्रेक्टिव सर्जरियां हैं। दोनों में कार्निया का आकार बदला जाता है ताकि प्रकाश बेहतर तरीके से रेटिना पर केंद्रित हो सके।

इसके रोकथाम के संबंध में उन्होंने बताया कि

मायोपिया को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कईं उपाय हैं, जिनके द्वारा आप इसके विकास को धीमा कर सकते हैं। आप अपनी आंखों और दृष्टि को सुरक्षित रखने के लिए निम्न कदम उठा सकते हैं।

नियमित अंतराल पर अपनी आंखों की जांच कराएं।
अगर आपको डायबिटीज और उच्च रक्तदाब है तो अपना उपचार कराएं, क्योंकि इनके कारण आपकी दृष्टि प्रभावित हो सकती है। अपनी आंखों को सूरज की परा-बैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाने के लिए जब भी घर से बाहर निकलें तो गॉगल लगाकर जाएं।
अपने डाइट चार्ट में रंग-बिरंगे फलों और सब्जियों तथा मछलियों को शामिल करें।
पढ़ने और कम्प्युटर पर काम करने के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर का ब्रेक लें।
अच्छी रोशनी में पढ़ें।
धुम्रपान न करें; धुम्रपान आपकी आंखों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
बच्चों को चहारदीवारी में बंद न रखें। उन्हें बाहर धूप में खेलने दें।
स्क्रीन के सामने कम समय बिताएं।
किताबों और आंखों के बीच में सही दूरी बनाकर रखें।
बच्चों को दो घंटे से अधिक टीवी और मोबाइल न चलाने दें।

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