एम के मिशन हाई स्कूल रामगढ़वा में श्रद्धा भक्ति के साथ कि गई भगवान विश्वकर्मा की पूजा

गाड़ी चालको एवं कर्मियों को उपहार स्वरूप दिया गया अंग वस्त्र

डी एन कुशवाहा

रामगढ़वा पूर्वी चंपारण- प्रखंड क्षेत्र के भलुवहिंया गांव स्थित एम के मिशन हाई स्कूल में 17 सितंबर शुक्रवार को इंजीनियरिंग और कला के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती के शुभ अवसर पर पूजा अर्चना की गई। तत्पश्चात मौके पर उपस्थित विद्यालय के सभी गाड़ी चालकों एवं कर्मचारियों को विद्यालय के निदेशक ध्रुव नारायण कुशवाहा के द्वारा उपहार स्वरूप अंग वस्त्र प्रदान किया गया एवं मिठाईयां खिलाई गई।
ज्ञात हो कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को विश्वकर्मा पूजा का त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन ही ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ था।

जानिए क्यों की जाती है विश्वकर्मा पूजा-

पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि को संवारने की जिम्मेदारी ब्रह्मा जी ने भगवान विश्वकर्मा को सौंपी। ब्रह्मा जी को अपने वंशज और भगवान विश्वकर्मा की कला पर पूर्ण विश्वास था। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया तो वह एक विशालकाय अंडे के आकार की थी। उस अंडे से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई।

मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा के अनेक रूप हैं। इसके तहत दो बाहु वाले, चार बाहु एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख एवं पंचमुख वाले विश्वकर्मा की बात कही गई है। विश्वकर्मा जी के मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी एवं दैवज्ञ नामक पांच पुत्र भी हैं। यह भी मान्यता है कि ये पांचों वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में पारंगत थे।
विश्वकर्मा पूजा की कथा के अनुसार प्राचीन काल में वाराणसी में एक रथ बनाने वाला अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह हमेशा धर्म की राह पर चलता था। हालांकि, तमाम अथक प्रयास के बावजूद वह दो जून के भोजन से अधिक धन हासिल नहीं कर पाता था। इस दंपत्ति के कोई संतान नहीं थे। इस वजह से पत्नी भी चिंतित रहती थी।
इस परेशानी के बीच एक पड़ोसी ब्राह्मण ने रथकार और उसकी पत्नी से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए कहा। ब्राह्मण की बात मानकर रथकार और उसकी पत्नी ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा की, जिससे उन्हें धन-धान्य और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और वे सुखी जीवन व्यतीत करने लगे। मौके पर विद्यालय के प्रभारी इंचार्ज व शिक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, विद्यालय के व्यवस्थापक हिमांशु कुमार हिमकर, निदेशक ध्रुव नारायण कुशवाहा, जीप चालक राकेश कुमार कुशवाहा, बस चालक महमूद मियां, बस चालक नागेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, मैक्सिमो भान चालक राजेश कुमार, गार्ड समीर पटेल, विद्यार्थी सोनू कुमार, आयुष राज, आकाश कुमार, मेराज आलम, रमन कुमार, मनदीप कुमार, सुमन कुमार तथा अभिभावक शिक्षक विजय कुमार राम सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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