भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी के अनुसार –बत्तख मियाँ के महात्मा गांधी जी की जान बचाने की घटना को झुटलाया नहीं जा सकता है: विजय अमित

डी एन कुशवाहा

रामगढ़वा पूर्वी चंपारण – आज़ादी की लड़ाई में कई सारे विचारधारा के लोगों का सामुहिक प्रयास रहा जो अपने-अपने तरीके से भारत माता की अंग्रेजी दासता से मुक्त करना ही आखिरी ऊद्देश्य रहा!महात्मा गांधी जी को इस कड़ी में सबसे ज्यादा लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ जो भले ही विवादास्पद रहा है। लेकिन उन्हें हाड़ मांस के मानव से देवता और राष्ट्रपिता के रूप में आज भी स्वीकार किया जाता है? बत्तख मियाँ को भले ही आज मुसलमान होने के नाते चम्पारण में हाशिये पर डाल दिया जाए और ऊनके मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर लगाये गये द्वार को हटा दिया गया है??लेकिन स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी के अनुसार –बत्तख मियाँ के महात्मा गांधी जी की जान बचाने की घटना को झुटलाया नहीं जा सकता है। उक्त बातें रंगकर्मी प्रसाद रत्नेश्वर जी के भांजा व अरेराज निवासी विजय अमित ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से शुक्रवार को बताई है। उन्होंने कहा है कि आज सत्ता के लिए समर्पित लोग मोतिहारी में गांधी जी को महिमामंडित करने के लिए बपुधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर गांधी जी के रेलवे यात्रा की झलक दिखाई देती है। लेकिन दुर्भाग्य से बत्तख मियाँ को गुमनाम कर दिया है! उन्होंने कहा कि धर्म के लिए समर्पित भाजपा सरकार ने राम जी के साथ हनुमानजी को अपने जीवन में शामिल कर लिया, लेकिन बत्तख मियाँ को लोगों की स्मृति से ही गायब कर दिया है!अब सवाल यह है कि क्या गाँधी जी मोतिहारी में आये थे? डॉ राजेंद्र प्रसाद साथ में थे? इरविन मैनेजर था? रात्रि में दावत दी गई थी? बत्तख मियाँ रसोइया के रूप में थे? गांधी जी को दूध दिया गया था? राजेन्द्र बाबू राष्ट्रपति के रूप में मोतिहारी अये थे? बत्तख मियाँ की कहानी को अपने द्वारा लोगों को बताये थे? बिहार सरकार को मुआवजा देने के लिए आदेश दिया था?पुराने रेलवे स्टेशन के प्रवेशद्वार पर बत्तख मियाँ के नाम का बोर्ड लगा था? अगर हाँ तो अविलंब गेट लगना चाहिए और महात्मा गाँधी जी के साथ उनकी भी एक मूर्ति स्मृति स्वरुप लगाई जानी चाहिए! उन्होंने कहा है कि अगर आपको और मोतिहारी के लोगों को ये सब कॉंग्रेस की चाल,कोरी कल्पना या झूठी कहानी लगती हो तो पहले बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन और चम्पारण सत्याग्रह आदि घटनाओं को मोतिहारी के इतिहास से अविलंब हटा देना चाहिए!! यदि आप अपने हिसाब से इतिहास को बदलने की कोशिश करते हैं तो भविष्य आपके लिए अँधियारे में परिवर्तित हो जाता है!!

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