आतंकियों के खात्मे का नया प्लान, ISIS-K के खिलाफ तालिबान को हथियार बनाएगा अमेरिका

वाशिंगटन  : अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद जहां तालिबानी लड़ाके जश्न मना रहे हैं वहीं राष्ट्रपति जो बाइडन ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के लिए नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस बार अमेरिका पहले से और ताकतवर होकर आईएस-खुरासान पर वार करेगा और इसमें उसकी मदद तालिबान कर सकता है। पेंटागन के टॉप अधिकारियों की मानें तो अमेरिका अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत यानी आईएस-के (ISIS-K) से लड़ने के लिए तालिबान के साथ सहयोग पर विचार कर रहा है। 

अब IS-खुरासान की खैर नहीं, तालिबान को 'हथियार' बनाएगा US, ऐसा होगा प्लान

मीडिया के मुताबिक, पेंटागन के टॉप अधिकारी ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान को हराने के लिए तालिबान के साथ समन्वय करने पर विचार कर रही है। जब बुधवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष सेना के जनरल मार्क मिली से आतंकवाद विरोधी प्रयास के लिए तालिबान के साथ सेना के हाथ मिलाने को लेकर पूछा गया तो उनका जवाब था कि यह संभव है। 

ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष आर्मी जनरल मार्क मिली ने कहा कि यह संभव है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों या अन्य के खिलाफ अफगानिस्तान में भविष्य में किसी भी आतंकवाद विरोधी हमले के लिए अमेरिका को तालिबान के साथ समन्वय करना होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि तालिबान एक ‘क्रूर’ संगठन है और वे बदलते हैं या नहीं यह देखा जाना बाकी है। उन्होंने आगे कहा कि युद्ध में आप वह करते हैं जो आपको मिशन और फोर्स के जोखिम को कम करने के लिए करना चाहिए।

अफगानिस्तान से 124,000 से अधिक अमेरिकी नागरिकों, अफगानों और अन्य लोगों को निकालने के दो दिन बाद मिली और रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने पेंटागन के संवाददाताओं से कहा कि फिलहाल, अफगानिस्तान में तालिबान के भविष्य की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि तालिबान और आईएसआईएस-के कम से कम अफगानिस्तान में एक दूसरे के दुश्मन नहीं तो प्रतिद्वंद्वी जरूर हैं। ऐसे में तालिबान का इस्तेमाल अमेरिका आईएस-के के खिलाफ कर सकता है।

What's next for the US, the Taliban and Afghanistan? | Asia | Al Jazeera

अमेरिका, अपने दुश्मनों के खात्मे के लिए तालिबान से हाथ मिला सकता है, इसकी प्रबलल संभावना भी इसलिए है, क्योंकि बीते दिनों यूएस सेंट्रल कमांड के प्रमुख मरीन जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने अफगानिस्तान से निकासी प्रक्रिया के दौरान तालिबान के साथ अमेरिकी संबंधों को बहुत व्यावहारिक और बहुत ही व्यवसायिक बताया था। उन्होंने कहा कि तालिबान ने एयरपोर्ट को सुरक्षित करने में अमेरिका की मदद की। बता दें कि बीते दिनों जब अमेरिका का निकासी अभियान जारी था, तभी काबुल एयरपोर्ट पर आईएस-खुरासान के आतंकी ने हमला कर दिया था, जिसमें अमेरिका के 13 जवान मारे गए थे। 

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