आज राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।

मनोज कुमार सिंह प्रदेश अध्यक्ष शारीरिक प्रकोष्ठ परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ.

आज आप सभी को विगत होगा कि मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मेजर ध्यानचंद का का वास्तविक नाम ध्यान सिंह था लेकिन वह चंद्रमा की रोशनी में हॉकी का अभ्यास किया करते थे इसलिए उनको ध्यान चंद कहा जाने लगा।

आप सभी लोग को इस अवसर पर 1936 के ओलंपिक खेलों का एक वाक्य याद दिलाना चाहता हूं जो संजोग बस 15 अगस्त 1936 को ही था भारत का सामना जर्मनी से था जिसे देखने के लिए खुद मैदान को हिटलर मौजूद था या यह कहा जय की यह मुकाबला भारत वर्सेस हिटलर से था तो यह गलत नहीं होगा ।दुनिया भर की निगाहें हॉकी ओलंपिक के फाइनल पर थी और हिटलर की निगाह मेजर ध्यानचंद पर थी पहले हाफ तक भारत जर्मनी से 1-0 से आगे था लेकिन हिटलर किसी भी कीमत पर यह मैच जितना चाहता था)
इसलिए वह मैदान पर पानी डालकर उसे गिला कर दिया जिससे भारतीय खिलाड़ी जिनके जूते बहुत अच्छे नहीं थे फिसल जाए लेकिन मेजर ध्यानचंद और उनके साथियों ने बिना जूते के मैच खेला हिटलर के सामने उसकी टीम को 8-1 से परास्त किया ।

भारतीय सेना का एक सिपाही जो कि एक साधारण परिवार से आता था उसने विश्व के सबसे खतरनाक तानाशाह हिटलर के मस्तिष्क पर एक गहरा छाप छोड़ा। एक बार फिर आप सभी को राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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