हंगामे के बीच राज्यसभा में पारित हुआ कृषि विधेयक, मंत्री तोमर ने बताई विधेयक की विशेषताएं

Publish Date: September 20 2020 02:11:20pm

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नई दिल्ली -राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा करार विधेयक 2020 ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक पारित होने के साथ ही राज्यसभा की कार्यवाही को कल सुबह 9 बजे तक पारित कर दिया गया। 

राज्यसभा में रविवार को कृषि सुधारों से संबंधित दो विधेयकों को पारित किये जाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष दलों के सदस्यों ने जबरदस्त हंगामा किया।  उप सभापति हरिवंश ने जब कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा करार विधेयक 2020 पर चर्चा के बाद इन्हें पारित कराने की प्रकिया शुरू की तो आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, द्रविड मुनेत्र कषगम और वामदलों के सदस्यों ने इसका विरोध कड़ा विरोध किया।

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कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रविवार को कहा कि सरकार किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहती है और उन्हें फसलों की बुआई के समय ही उसकी उचित कीमत का आश्वासन दिलाने का प्रयास कर रही है । तोमर ने राज्यसभा में कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक 2020 पेश करते हुए कहा कि दोनों विधेयक ऐतिहासिक है जिन्हें लोकसभा पारित कर चुकी है। कृषि मंत्री के विधेयक पेश करने के पूर्व मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के के. के. रागेश और छह अन्य सदस्यों ने इन विधेयकों से संबंधित अध्यादेशों को निरस्त करने के संकल्प पेश किया। इन विधेयकों में किसानों को मंडी से बाहर कहीं भी मनमानी कीमत पर अपनी फसलों की बिक्री की आजादी दी गई है। इसके साथ ही अनुबंध कृषि का प्रावधान किया गया है। इससे अधिक मूल्य मिलने वाली फसलों की खेती बढे़गी और अत्याधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा मिल सकेगा। तोमर ने कहा कि किसान अब अपनी मर्जी से फसलों की बिक्री कहीं भी कर सकेंगे। इसके साथ ही अधिक मूल्य मिलने वाली फसलों की खेती का विस्तार किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अब फसलों की बुआई के समय ही उसकी उचित कीमत का आश्वासन मिल सकेगा। पहले किसान मनचाहे स्थान और मूल्य पर अपनी फसल नहीं बेच सकते थे। उन्होंने कहा कि कृषि उपज विपणन समिति (कृषि मंडी) से किसानों को न्याय नहीं मिलता था और इसमें पारदर्शिता नहीं थी । इन विधेयकों के माध्यम से किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है । इसके साथ ही किसानों को फसलों की बिक्री के तीन दिन के अंदर ही उसकी कीमत की व्यवस्था की गयी है ।
तोमर ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था जारी रहेगी । उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान भी कृषि सुधार से संबंधित ऐसी ही राय व्यक्त की गयी थी। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के पारित होने से किसानों के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आएगा।

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आप पार्टी के संजय सिंह, कांग्रेस सैलजा तथा तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन नारे लगाते हुए सदन के बीचों बीच आ गए और हंगामा करने लगे। इस पर उप सभापति ने सदस्यों वापस जाने की अपील की और कहा कि कोरोना का समय है तथा इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। लेकिन सदस्यों ने शोर शराबा रखा और श्री हरिवंश ने इसी के बीच विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी।