लखनऊ: पढ़ाई छोड़ रहे सरकारी, एडेड स्कूलों के छात्र

कोरोना संक्रमण का असर कहें या कुछ और लेकिन राजधानी के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हैं।  कई छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ गांव की ओर पलायन कर चुके हैं। स्कूलों के स्तर पर बार-बार कोशिश के बाद भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें कक्षा 8 और 10 के बच्चे ज्यादा हैं। जानकार इसे कोरोना संक्रमण के बाद सामने आए आर्थिक संकट से जोड़ रहे हैं। 

राजधानी में करीब 98 एडेड स्कूल और 50 से ज्यादा राजकीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। 90 प्रतिशत स्कूलों में यही हालात हैं। ज्यादातर अभिभावक फीस के लिए पैसे न होने की बात कर रहे हैं।  राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज की प्रिंसिपल कमलेश कुमारी चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी छात्र संख्या 700 से ज्यादा थी। वर्तमान में यह आंकड़ा 620 है। इसमें कई ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने आठवीं और दसवीं की परीक्षा पास की है और दाखिले नहीं लिए। लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश की जा रही है पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है। 
 

लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल प्रशांत मिश्रा ने बताया कि आठवीं कक्षा में 122 बच्चे पास हुए थे। अभी तक सिर्फ 75 ने 9वीं में दाखिला लिया है। इनमें भी 6 बच्चे दूसरे निजी स्कूलों से आए हैं। इन बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करने की कोशिश की गई। कुछ से तो संपर्क ही नहीं हो पाया वहीं जिन से बात हुई उनमें ज्यादातर गांव वापस लौट गए हैं।  डीएवी इंटर कॉलेज में इस सत्र में छात्र संख्या 14 सौ से गिरकर 1100 के आसपास पहुंच गई है। प्रिंसिपल नरेंद्र देव ने बताया उनके अपने स्कूल के बच्चे ही दाखिले नहीं ले पाए हैं। कई छात्रों की ओर से फीस भर पाने में भी असमर्थता जताई जा रही है। 
 

राजकीय सैनिक इंटर कॉलेज सरोजनी नगर की प्रिंसिपल रेनू चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी छठी कक्षा में 70 से ज्यादा दाखिले हुए थे। अभी कई प्रयासों के बावजूद यह संख्या 35 के आसपास पहुंची है। 
कमोवेश ज्यादातर सरकारी और एडेड स्कूलों का यही हाल है। 

 एक तस्वीर यह भी 
निजी स्कूलों के छात्र सरकारी में ले रहे दाखिला

निजी स्कूलों की फीस न भर पाने के कारण कई अभिभावक सरकारी स्कूल का रुख कर रहे हैं। आंकड़ों पर भरोसा करें तो पिछले वर्षों के मुकाबले इनकी संख्या काफी बढ़ी है। राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज की प्रिंसिपल कमलेश कुमारी चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले ऐसे बच्चों की संख्या करीब 30 से 35% तक बढ़ी है। फीस न होने के कारण निजी से सरकारी और एडेड स्कूलों की ओर छात्रों का पलायन कक्षा 9 और 11 में सबसे ज्यादा है।  नारी शिक्षा निकेतन के प्रबंधक अनिल अग्रवाल ने बताया कि दसवीं में उनके स्कूल से 112 बच्चों ने परीक्षा दी। 11वीं में 172 दाखिले हुए।