रिलायंस की लंबी छलांग, न्यूजीलैंड और कतर की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली : मुकेश अंबानी के मालिकाना हक वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने लंबी छलांग लगाई है। आरआईएल देश की पहली ऐसी कपंनी बन गई है, जिसका मार्केट कैप 200 अरब डॉलर यानी करीब 14.60 लाख करोड़ रुपये हो गया है। गुरुवार को रिलायंस के मार्केट कैप ने अमेरिका की ड्रग्स बनाने वाली दिग्गज कंपनी पीफाइजर को भी पीछे छोड़ दिया। जर्मनी की सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी शेप और चीन की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी पिंगएन भी रिलायंस से पीछे रह गई हैं। अब ग्लोबल मार्केट कैप में रिलायंस की रैंकिंग 42 हो गई है, जो इसी साल मार्च में 102 थी। 23 मार्च से अब तक कंपनी के स्टॉक 164 फीसदी तक चढ़े हैं। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम के काम इस वक्त करीब 40 करोड़ ग्राहक हैं, जिसके चलते विशेषज्ञ मानते हैं कि टेलिकॉम इंडस्ट्री में रिलायंस की तगड़ी पकड़ है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी तेजी से अपना कारोबार फैला रहा है और ई-कॉमर्स सेगमेंट में भी घुस चुका है। ऐसे में हर क्षेत्र में रिलायंस का दबदबा हो गया है। पहले रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में एक के बाद एक कई कंपनियों ने निवेश किया और अब रिलायंस के रिटेल कारोबार में भी निवेश हो रहा है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में जिसने 1993 में 1 लाख रुपये लगाए थे, आज उसके शेयर की कीमत 77 लाख रुपये हो गई है। यानी कि कंपनी के स्टॉक ने 17.6 फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। बता दें कि इन सालों में सेंसेक्स भी 11 फीसदी की दर से बढ़ा है। यानी कि 30 टॉप कंपनियों की हालत दिखाने वाले सेंसेक्स से भी शानदार ग्रोथ सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज ने की है। रिलायंस ने 100 अरब डॉलर से 150 अरब डॉलर तक पहुंचने में 12.5 साल लगाए, जबकि कंपनी ने सिर्फ 83 दिनों के अंदर 50 अरब डॉलर अपने मार्केट कैप में जोड़े हैं। अगर गुरुवार को आरआईएल के शेयर के बंद भाव के मुताबिक देखा जाए तो रिलायंस का मार्केट कैप न्यूजीलैंड और कतर की अर्थव्यवस्था से भी बड़ा हो गया है। वहीं ग्रीस और पेरू की अर्थव्यवस्था से बस चंद कदम पीछे है। भारत की बात करें तो ये रिलायंस का मार्केट कैप यूपी जैसे सबसे अधिक आबादी वाले बड़े राज्य की जीडीपी से भी अधिक है। वहीं यह मार्केट कैप महाराष्ट्र की जीडीपी के करीब आधी है।