यूपी : निकायों को बताना होगा कि किस मद में कितना लिया जा रहा लाइसेंस शुल्क

निकायों को अब ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाइसेंस शुल्क के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि किस मद में कितना शुल्क लिया जा रहा है। तय शुल्क से अधिक की वसूली नहीं कर सकेंगे। इसके बाद भी शिकायत आने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

निवेश मित्र पोर्टल पर नहीं दी जानकारी
राज्य सरकार प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को बेहतर सुविधाएं देना चाहती है। इसके लिए जनता से जुड़ी सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाना है। निवेशकों की सुविधा के लिए निवेश मित्र पोर्टल पर सभी तरह के लाइसेंस शुल्क को ऑनलाइन किया जाना है।

इसमें बताना है कि किस मद में कितने शुल्क की वसूली की जा रही है। इसके बाद भी निकाय इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसकी मुख्य वजह मनमाने तरीके से शुल्क की वसूली करना और अपनी सुविधा के अनुसार काम करना है। शासन स्तर पर समीक्षा के बाद प्रदेश के अधिकतर निकायों की यह स्थिति सामने आई है। इसीलिए शुल्क संबंधी सभी ब्यौरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया है।

कुल 115 तरह के लिए जा रहे हैं शुल्क

नगर निगम अधिनियम और पालिका परिषद अधिनियम में निकायों को जरूरत के आधार पर शुल्क लेने की व्यवस्था दी गई है। इसलिए निकाय अपने-अपने हिसाब से उपविधियां बनाते हुए शुल्क की वसूली करते हैं। स्थानीय निकाय निदेशालय के मुताबिक प्रदेश में करीब 115 तरह के शुल्क वसूले जा रहे हैं, लेकिन किस मद में कितना शुल्क लिया जा रहा है। इसकी जानकारी स्थानीय निकाय निदेशालय को भी नहीं है। इसीलिए स्थानीय निकाय निदेशक डा. काजल ने निकाय अधिकारियों को शुल्क का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया है।