भारत चीन के बीच तनाव दूर करने के लिए पांच सूत्रीय सहमति के बावजूद नहीं दूर हुए मतभेद

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को कम करने के लिए तैयार किए गए पांच सूत्रीय रोडमैप और सैनिकों में हटाने में तेजी लाने पर बनी सहमति के बाजवूद एलएसी पर दोनों देशों के बीच गतिरोध जारी है। मॉस्को में गुरुवार की रात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से इतर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्षीय वांग यी के बीच बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में पांच सूत्रीय समझौते पर सहमति बनी थी।

इन पांच सूत्रीय समझौतों के लिए की गई बातचीत का उद्देश्य सैनिकों के जल्द हटाने, दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने और तनाव कम करने, सीमा प्रबंधन के सभी प्रोटोकॉल्स और समझौतों का पालन करने और स्थिति ठीक करने के लिए नए विश्वास बहाली के उपायों पर काम करना शामिल है।

वांग यी का हवाला देते चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत और चीन जैसे दो प्रमुख पड़ोसियों के बीच मतभेद होना सामान्य है और द्विपक्षीय संबंध “एक चौराहे” पर आ गया है, हालांकि कोई चुनौती नहीं है जिसे दूर नहीं किया जा सकता है, अगर दोनों पक्ष सही दिशा में आगे बढ़ते हैं।

इन टिप्पणियों में हाल के हफ्तों में चीन के रुख से थोड़े बदलाव के संकेत है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की 4 सितंबर को उनकी चीनी समकक्ष वेई फेंघे के साथ बैठक के दौरान भारतीय पक्ष को पूरी तरह से तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराए गया था। हालांकि, इलाकों में दोनों पक्षों के बीच काफी मतभेद बने हैं और जानकारों का कहना है कि दोनों देशों ने अप्रैल से पहले की स्थिति को बहाल करने के बारे में कुछ नहीं बोला, ना ही सैनिकों को हटाने और तनाव कम करने की कोई समय-सीमा तक की है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने  बयान में यह भी कहा कि भारतीय पक्ष “भारत-चीन बेहतर संबंधों को सीमा विवाद के समाधान पर निर्भर होना नहीं मानता है”, लेकिन इसे घटनाक्रम से परिचित सूत्र ने इसे खारिज कर दिया। सूत्र ने बताया कि जयशंकर ने बैठक से पहले ही इस बात पर जोर दिया था कि ‘देश के संबंध’ को ‘देश की सीमा’ से अलग नहीं किया जा सकता है।

सूत्र ने बताया कि बैठक के दौरान जयशंकर ने यह साफ कहा कि हाल में पूर्वी लद्दाख की घटनाओं का द्विपक्षीय संबंध पर अवश्यक रूप से प्रभावित किया है। सूत्र ने कहा, एक तरफ जहां भारतीय पक्ष यह मानता है कि सीमा विवाद समाधान के लिए समय और कोशिशों की आवश्यकता है, यह साफ था कि सबंधों की बेहतरी के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थायित्व आवश्यक है।