झारखंड: मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक से कांग्रेस-BJP गायब

रांची: झारखंड विधानसभा (Jharkhand Vidhansabha) के मानसून सत्र (Monsoon Session) की तैयारी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक दल और प्रतिनिधियों की बुलाई बैठक. बैठक में कांग्रेस और बीजेपी के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए. बैठक में सत्ताधारी दल की तरफ से मंत्री मिथलेश ठाकुर, आरजेडी कोटे से मंत्री सत्यानंद भोक्ता, निर्दलीय विधायक सरयू राय, माले विधायक विनोद सिंह और विधायक प्रदीप यादव बैठक मव शामिल हुए. इस दौरान सदन को सुचारु रूप से चलाने की सहमति बनी.

बैठक के बाद विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने कहा, ‘सभी दलों को बैठक में बुलाया गया था. कार्य व्यस्तता की वजह से कुछ लोग शामिल नहीं हो पाए हैं. बीजेपी को भी बैठक में आमंत्रित करने के लिए उनके नेता को पत्र गया था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘सदन आहूत होने से पहले सदन के संचालन को लेकर बैठक होती है. बैठक में सत्र एजेंडे पर चर्चा हुई और सुझाव भी लिए गए हैं.’

सत्ताधारी दल की तरफ से बैठक में मंत्री मिथलेश ठाकुर ने पार्टी का प्रतिनिधित्व किया. मंत्री मिथलेश ठाकुर ने बताया कि कोरोना काल के कारण संक्षिप्त मानसून सत्र बुलाया गया है. तीन दिनों की कार्य अवधि है.  बैठक में तय हुआ कि सत्र को सुचारु रूप से चलाया जाए. सत्र की उपयोगिता को हम साबित करें और कोशिश होगी छोटे सत्र का भरपूर उपयोग हो. जहां तक बीजेपी के प्रतिनिधि के शामिल होने का सवाल है तो इसका जवाब बीजेपी ही दे पाएगी, बीजेपी के लोग बात करते हैं कि उन्हें झारखंड की चिंता है, तो सदन ऐसा स्थान जहां से पूरे राज्य की बात उठा सकते हैं, उनका नहीं आना ये बताने के लिए काफी है की राज्य के बारे में उनकी कितनी सोच है.

आरजेडी कोटे के मंत्री सत्यानन्द भोक्ता ने कहा कि सरकार हर तरीके से तैयार है. जन मुद्दे उठने चाहिए, तीन दिन महत्वपूर्ण है. सरकार अच्छे तरीके से सदन में जवाब देगी, सरकार काम कर रही है. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक के बाद निर्दलीय विधायक सरयू राय ने कहा, मानसून सत्र तो वैसे भी छोटा ही होता है. इस समय तो कोविड काल है तो हम लोगों ने सुझाव दिया था कि सत्र एक दिन और बढ़ा दीजिये या इसी दो दिन में समय सीमा बढ़ा दी जाए. कोविड कि बारे में स्वास्थ्य विभाग कैसे काम कर रहा है इसकी सदन में पूरी सूचना आनी चाहिए. स्वास्थ्य मंत्री या मुख्यमंत्री को सदन में इस पर विशेष वक्तव्य देना चाहिए.

माले विधायक विनोद सिंह ने कहा, लगभग 6 महीने बाद विधानसभा हो रही है. 6 महीने परेशानियों का समय रहा है. अगर अभी विधानसभा हो रही है तो यहां उन परेशानियों पर बात हो. कोविड काल को आपातकाल बताया गया पर इस दौरान पुलिस पर हमले की घटना भी सामने आई है. सदन में लोगो को पर्याप्त मौका मिले और सभी मुद्दों पर बात हों.

इधर, बैठक में शामिल होने के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेपी की तरफ से विधायक सीपी सिंह को आमंत्रित किया था, जबकि बीजेपी विधायकों ने बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) को नेता विधायक दल चुना है. ऐसे में सीपी सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई थी. बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष ने अब तक बाबूलाल मरांडी को बीजेपी विधायक दल नेता के तौर पर मान्यता नहीं दी है.

 बैठक में बीजेपी की तरफ से किसी भी प्रतिनिधि के शामिल नहीं होने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा, ‘अध्यक्ष सभी दल को बुलाते हैं. सभी दल अपना-अपना सुझाव देते हैं. इस पर अध्यक्ष ही निर्णय लेते हैं और सदन चलाते हैं. बीजेपी के लोग क्यों नहीं शामिल हुए, यह नहीं कह सकता पर उन्हें आना चाहिए था. विपक्ष में हैं तो सरकार के खिलाफ बोलने है तो बोलते रहें. अध्यक्ष के बुलावे पर जरुर आना चाहिए, नहीं आना अच्छी बात नहीं है.