चीन को सख्त संदेश

First slide

लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ पिछले कुछ समय से चले आ रहे तनाव के कारण सीमा पर स्थिति काफी तनावपूर्ण है। 

ऐसे में संसद के उच्च सदन राज्यसभा में बोलते हुए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि चीन की कथनी और करनी में अंतर है। चीन की ओर से द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करने से ही यह तनाव पैदा हुआ। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत बातचीत का पक्षधर है मगर झुकने वालों में से नहीं है। उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए चाहे जितना कड़ा कदम उठाना पड़े, हम उठाने को तैयार हैं। हम देश का मस्तक नहीं झुकने देंगे, न किसी का मस्तक झुकाना चाहते हैं। हमारे सैनिक चीन की सेना की आंख से आंख मिला कर खड़े हैं। भारत की सेना को पैट्रोलिंग से कोई नहीं रोक सकता, इसका पैटर्न नहीं बदलेगा। राजनाथ ने विस्तार से घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन ने द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया। चीन ने सीमा पर सैनिक जुटाए, जो 1993 और 1996 में हुए समझौतों के खिलाफ है। मई में चीन ने गलवान में भारतीय सैनिकों की पैट्रोलिंग रोकी।

भारतीय सैनिकों ने 15 जून को गलवान में चीनी सेना को तगड़ा जवाब दिया। जवानों ने इन सभी घटनाओं के दौरान जहां संयम दिखाना था, वहां संयम दिखाया और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य दिखाया। राजनाथ ने ताजा हालात के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कई जगहों पर तनाव की स्थिति है। चीन ने सीमा पर जवानों की भारी तैनाती की है और गोला-बारूद जुटाया है। भारतीय सेना ने भी काउंटर डिप्लॉयमेंट किया है। उन्होंने कहा कि हम मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन साथ ही किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने राजनयिक एवं कूटनीतिक माध्यम से पड़ोसी देश को बता दिया है कि यथास्थिति में एकतरफा ढंग से बदलाव का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य होगा। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से 5180 वर्ग किलोमीटर की भारतीय जमीन चीन को दे दी है। सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के मुद्दे पर हम सब एक हैं। उनकी पार्टी चीन के साथ विवाद के मुद्दे पर पूरी तरह से सरकार के साथ खड़ी है। यह प्रयास होना चाहिए कि चीनी सैनिक अप्रैल में जहां थे, वहीं लौटें। पूर्व रक्षा मंत्री व कांग्रेस नेता एके एंटनी ने कहा कि सीमा पर गश्त प्रणाली में बदलाव नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के साथ ही जेडीयू, सपा, शिवसेना, आप, आरजेडी, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी, बसपा समेत सभी दलों ने रक्षा मुद्दे पर सेना और सरकार के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध की शुरुआत तो हमारे हाथ में हैं लेकिन उसका अंत नहीं। जिस धरती से शांति का संदेश पूरे विश्व में गया है उस धरती की शांति में विघ्न डालने के प्रयास किए जा रहे हैं। चीन को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट व सख्त शब्दों में कह दिया है कि भारत चीन की नापाक हरकतों को बर्दाश्त करने वाला नहीं। चीन अगर तनाव कम करना चाहता है तो उसे अपनी फौजें उस स्थिति पर ले जानी होंगी जो अप्रैल 2020 में थी। मास्कों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, उसमें भी यही सहमति बनी थी कि तनाव को कम करने व सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए दोनों देशों में संवाद जारी रहेगा।

वर्तमान स्थिति यह है कि संवाद ठप्प पड़ा है और चीन आये दिन भारतीय सीमा पर तनाव बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। ऐसी स्थिति से स्पष्ट है कि चीन भारत पर दबाव बनाकर भारत की जमीन जिस पर उसके सैनिक आ गये हैं को हड़पना चाहता है। चीन की बदनियत को समझते हुए भारत ने जिस तरह सीमा पर आक्रमक पहल कर स्थिति अपने पक्ष में की है उससे चीन अभी तो परेशान दिख रहा है। लेकिन चीन यह भी समझ रहा है कि भारत इस स्थिति को लंबे समय तक बनाये नहीं रख सकेगा और सर्दी में उसे पीछे हटना ही पड़ेगा और ऐसे में वह अपने नापाक इरादों को अंजाम देने में सफल हो जाएगा। अतीत में जाएं तो पायेंगे कि चीन भारत को बातों में उलझाकर अपनी मनमर्जी से कार्य करता रहा है। भारत और चीन में हुए समझौतों का चीन ने कभी सम्मान नहीं किया। कारण चीन को लगता है कि भारत आर्थिक व सैन्य दृष्टि से उससे कम•ाोर है, इसलिए अधिक देर दबाव झेल नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालने से पहले तक तो चीन का भारत प्रति उपरोक्त दृष्टिकोण किसी हद तक सही ही था लेकिन मोदी सरकार ने चीन प्रति जो रुख अपनाया है उससे चीन की साख व छवि दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम•ाोर हुए हैं। विश्व स्तर पर चीन आज एक खलनायक के रूप में देखा जा रहा है। अहंकारग्रस्त चीन के अपने भीतर की स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए चीन अपने पड़ोसी देशों से विवाद खड़े कर चीनी जनता का ध्यान भीतरी विवादों से हटाना चाह रहा है।

भारत के पास वर्तमान स्थिति में तीन ही विकल्प हैं, पहला कि लद्दाख क्षेत्र की ऊंची चोटियों में अब सर्दियों में भी सेना को रहना होगा, इसलिए सरकार को हर दृष्टि से उचित इंतजाम करने चाहिए। दूसरा भारतीय बाजार को चीनी उत्पादों से मुक्त कराने की गति को तेज करना होगा। तीसरा सैन्य व आर्थिक दृष्टि से अपने को मजबूत करना होगा। चीन के साथ अब जल्द संंंबंध सामान्य होने वाले नहीं हैं। पाकिस्तान व चीन की नजदीकियों को देखते हुए इन दोनों के साथ लगती सीमा पर स्थाई तौर पर ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे उन द्वारा किए हमले का सफलतापूर्वक जवाब दिया जा सके। चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ निकट भविष्य में भारत के संबंध सामान्य नहीं होने वाले, इसलिए उपरोक्त दोनों देशों की नीयत व नीति को देखते हुए मात्र सख्त संदेश देने से बात नहीं बनने वाली। भारत को आर्थिक व सैनिक दृष्टि से मजबूत होना होगा, यही समय की मांग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *