कोरोना काल में लोकसभा हुई Digitalised, मोबाइल ऐप से सांसद लगाएंगे हाजिरी

नई दिल्ली: आगामी सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में दाेनों सदनों का नजारा बदला हुआ होगा। लोकसभा का कामकाज शत प्रतिशत डिजीटाइज़्ड हो जाएगा। सदस्य संसद में अपनी हाजिरी एक मोबाइल ऐप्लीकेशन के माध्यम से लगाएंगे। कार्यवाही के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार सदस्यों के बैठने की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। लोकसभा में सदन में केवल 257 सदस्यों को बैठने दिया जाएगा। लोकसभा की दर्शक दीर्घा में 172, राज्यसभा की दर्शक दीर्घा में 51 जबकि राज्यसभा के सदन में 60 सदस्यों के बैठने का स्थान होगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यहां संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि सभी राजनीतिक दलों को लोकसभा में उनकी संख्या के अनुपात के आधार पर अलग अलग जगहों पर सीटें आवंटित करके उन दलों के नेताओं को जानकारी दे दी गई है। अब किस सांसद को कहां बैठाना है, यह निर्णय दल का नेता करेगा। दलों के नेताओं को यह सलाह भी दी गयी है कि 60 से अधिक आयु वाले सदस्यों को मुख्य सदन में भी बिठाया जाय।

बिरला ने कहा कि सभी सदस्यों का आरटी-पीसीआर से कोरोना का टेस्ट कराया जाएगा और निगेटिव रिपोर्ट होने पर ही वे सदन की कार्यवाही में भाग लेंगे। इसी प्रकार से संसद कवर करने वाले पत्रकारों एवं यहां काम करने वाले कर्मचारियों का भी टेस्ट अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही बदली बदली होगी। लोकसभा में सदस्यों की सीटों के बीच एवं आगे पीछे फाइबर की सीट लगायी गयी है और सदस्यों को सीट पर ही बैठे बैठे अपनी बात कहनी होगी। दर्शकदीर्घा में बैठने वाले सदस्यों के बोलने के लिए कुछ दूरी पर पोडियम लगाये गये हैं। राज्यसभा में बैठने वाले सदस्यों को कैमरे के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष से मुखातिब होंगे।

उन्होंने कहा कि सांसदों को उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अब रजिस्टर में हस्ताक्षर करने की जरूरत नहीं होगी। उनके लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन बनाया गया है। यह ऐप संसद भवन परिसर में आने पर ही सक्रिय होगा और मोबाइल के कैमरे से तस्वीर खींच कर सांसदों की उपस्थित दर्ज की जाएगी। सांसदों के माेबाइल फोन में ये ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार सदन के काम को शत प्रतिशत डिजीटाइज्ड कर दिया जाएगा। पिछले सत्र में 62 प्रतिशत कामकाज डिजीटाइज्ड हो गया था। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वह संसद की बैठक को वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आयोजित करने को उपयोगी नहीं मानते हैं। संसद की कार्यवाही तो प्रत्यक्ष होनी चाहिए।

लोकसभा सचिवालय ने सुरक्षा एवं स्वास्थ्य प्रोटाेकॉल के अनुपालन के व्यापक बंदोबस्त किये हैं और बहुत सीमित संख्या में कर्मचारियों एवं पत्रकारों को पास दिये हैं। लोकसभा में अध्यक्ष के आसन के बाँयी ओर का स्क्रीन और ऊपर की तरफ लगा दाँयी ओर का स्क्रीन राज्यसभा का दृश्य दिखाएगा। गैलरी में सैनेटाइजर डिस्पेंसिंग मशीन भी लगीं हैं। सदस्यों के बैठने वाले स्थानों काे रोज़ाना सैनेटाइज़ किया जाएगा। लोकसभा सचिवालय के कर्मचारी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि सदन में केवल 257 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। लोकसभा की दर्शक दीर्घा में 172, राज्यसभा की दर्शक दीर्घा में 51 जबकि राज्यसभा के सदन में 60 सदस्यों के बैठने का स्थान होगा। प्रधानमंत्री एवं सभी मंत्री लोकसभा में बैठेंगे।

बिरला के अनुसार लोकसभा में इस बार प्रश्नकाल भले ही नहीं होगा लेकिन सदस्यों को अतारांकित प्रश्न पूछने का अवसर मिलेगा और उनके उत्तर सदन के पटल पर रखे जाएंगे। शून्यकाल आधे घंटे का होगा। उन्होंने कहा कि 14 सितंबर को सदन की कार्यवाही पहले दिन सुबह नौ बजे से एक बजे तक चलेगी जिसमें सदन की कार्यवाही के संशोधित प्रारूप पर सदस्यों की स्वीकृति हासिल की जाएगी। इसके बाद अगले दिन से एक अक्टूबर तक अपराह्न तीन बजे सेे शाम सात बजे तक कार्यवाही चलेगी। सदन की स्वीकृति होने पर कार्यवाही के समय को बढ़ाया भी जा सकता है। रविवार एवं शनिवार को कोई अवकाश नहीं होगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि 17वीं लोकसभा ने उत्पादकता को लेकर कीर्तिमान रच दिया है। सदन की अभी तक की कुल उत्पादकता 110 प्रतिशत रही है जो एक रिकार्ड है। पहले सत्र में 37 बैठकें हुईं जिनमें प्रश्नकाल पूरे पूरे चले। दूसरे सत्र में उत्पादकता 115 प्रतिशत और तीसरे सत्र में 90 प्रतिशत रही। 17वीं लोकसभा में तारांकित प्रश्नों को लिये जाने के मामले में भी सुधार हुआ है। पहले प्रतिदिन औसतन 3.35 प्रश्न आते थे पर अब ये आंकड़ा 6.68 प्रश्न हो गया है। इसी प्रकार से नियम 377 के तहत उठाये गये शत प्रतिशत मामलों में मंत्रियों ने सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से उत्तर दिये हैं। सदस्यों ने अपने क्षेत्र की भावनाओं एवं समस्याओं को सदन में रखा और सरकार ने उसका जवाब दिया। इससे जमीनी लोकतंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी संसद की 27 समितियों 91 बैठकें हुईं हैं।

एक सवाल के जवाब में बिरला ने स्पष्ट किया कि इस बार वह सर्वदलीय बैठक नहीं बुला रहे हैं। कोरोना काल की विपरीत परिस्थितियों में संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के लिए आयोजित संसद के मानसून सत्र के पहले 13 सितंबर को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक होगी जिसमें तकरीबन सभी दलों के सदस्य रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी दलों को साथ लेकर संसद की कार्यवाही चलेगी। पहले भी सबका साथ सबका सहयोग मिला है। इस बार भी राष्ट्रहित में हम सबके समक्ष इस चुनौती का समाधान मिल कर निकाला जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी है कि वह लोकसभा को अधिक से अधिक जनता के प्रति जवाबदेह बनायें। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में वह हर किसी को अपनी बात नियमानुसार कहने का अवसर दें। सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करें।

संसदीय समितियों में न्यायालय में विचाराधीन मामले उठाये जाने एवं समितियों में उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर  बिरला ने कहा कि उन्होंने सभी समितियों के सभापतियों को पत्र लिख कर सलाह दी है कि न्यायालय के विचाराधीन मामलों को संसद के किसी भी मंच पर उठाये जाने की परंपरा नहीं है। लेकिन यह प्रतिबंधित भी नहीं है। यदि चर्चा से अदालत की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ता है तो चर्चा की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि पत्र में उन्होंने किसी विषय के न्यायालय के विचाराधीन होने को परिभाषित भी किया है। केवल याचिका दाखिल होने से ही कोई मामला न्यायालय की परिधि में नहीं माना जा सकता है। उस याचिका का स्वीकार होना एवं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होना भी जरूरी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समितियों के सभापति एवं सदस्य इसका ध्यान रखेंगे।