अनलॉक का असर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 को मद्देन•ार रखते हुए और विश्व स्तर पर उसके कहर को भांपते हुए जब मार्च में लॉकडाउन की घोषणा की थी तब से लेकर अब तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यापार व उद्योग जगत के निशाने पर थे। केवल व्यापार व उद्योग ही नहीं कृषि मजदूर, किसान व आम आदमी भी यही समझता था कि कोरोना महामारी के प्रति जो नीति मोदी सरकार ने अपनाई है इस से देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। आज आठ माह बाद स्थिति यह है कि विश्व स्तर पर देखें तो कोरोना महामारी से लडऩे में मोदी सरकार द्वारा अपनाई नीति का देश के जन साधारण को लाभ मिला है और भारत सरकार द्वारा लिए निर्णयों की विश्व स्तर पर भी सराहना हो रही है। 


अनलॉक के बाद अब अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर माह में वस्तु एवं सेवा कर आठ माह बाद पहली बार एक लाख करोड़ रुपये पार कर गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार जीएसटी संग्रह अक्टूबर में करीब 10 फीसदी बढ़ा है जबकि जुलाई में इसमें 14 फीसदी, अगस्त में 8 फीसदी की गिरावट आई थी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों से ज्यादा मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए और इसकी स्थिरता के लिए नवंबर के बाद के आंकड़ों पर नजर रखने की जरूरत है। पीडब्ल्यूसी में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि त्योहारों को देखते हुए नवंबर में भी जीएसटी संग्रह का आंकड़ा बढ़ सकता है। ऐसे में इस रुझान को समझने के लिए हमें नवंबर के बाद के आंकड़ों को देखने की जरूरत है। अक्टूबर में 80 लाख इनपुट-आउटपुट रिटर्न भरे गए हैं। जैन ने कहा कि 2019-20 के लिए इनपुट कर क्रेडिट का दावा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी और संभव है कि बहुत सारी कंपनियों ने खुद और अपने वेंडरों से रिटर्न फाइल करने को कहा हो। डेलॉयट में वरिष्ठ निदेशक एमएस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह दर्शाता है कि खपत में सुधार हुआ है और त्योहारों में मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अगर यह रुझान जारी रहता है तो वित्त वर्ष 2021 में राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिलेगी और सभी क्षेत्रों में कारोबारी भरोसे में सुधार को बल मिलेगा।

केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और मुआवजा उपकर सभी में प्राप्तियां सितंबर की तुलना में अक्टूबर में बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए केंद्रीय जीएसटी मद में अक्टूबर में 19,193 करोड़ रुपये मिले जो सितंबर में 17,741 करोड़ रुपये थे। राज्य जीएसटी संग्रह अक्टूबर में 25,411 करोड़ रुपये जबकि सितंबर में यह 23,131 करोड़ रुपये था। इसी तरह एकीकृत जीएसटी मद में 52,540 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जबकि सितंबर में 47,484 करोड़ रुपये मिले थे। इनमें से 23,375 करोड़ रुपये आयात की गई वस्तुओं से प्राप्त हुए हैं। मुआवजा उपकर प्राप्ति भी सितंबर के 7,124 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर अक्टूबर में 8,011 करोड़ रुपये पहुंच गई। इनमें 932 करोड़ रुपये आयातित वस्तुओं से प्राप्त हुए हैं। ईवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि मासिक आधार पर जीएसटी संग्रह में वृद्घि स्वागत योग्य है और सरकार तथा अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मांग बढऩे तथा इनपुट कर क्रेडिट के कारण सितंबर में संग्रह बढ़ा है।
विशेषज्ञों के विचार सिर-माथे लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि अनलॉक का असर अब दिखाई देने लगा है।