Published On: Mon, Oct 16th, 2017

जिनपिंग का फिर प्रेसिडेंट बनना तय

बीजिंग. चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) 18 अक्टूबर से अपनी 19वीं नेशनल कांग्रेस का आयोजन करने जा रही है। यह बैठक हर 5 साल बाद होती है। इसमें पार्टी को नया नेता और देश को नया मिलता मिलता है। शी जिनपिंग का एक बार फिर प्रेसिडेंट बनना करीब-करीब तय है। इस बार सीपीसी में जिनपिंग के मददगार बढ़ गए हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे में पार्टी कॉन्स्टिट्यूशन में सुधार करके ‘शी जिनपिंग थॉट’ को शामिल करेगी। अगर ऐसा होता है तो जिनपिंग माओ और देंग जियाओ पिंग जैसे नेताओं के लेवल पर पहुंच जाएंगे। चीन में अभी मार्क्सिज्म-लेनिनिज्म, माओ थॉट, देंग जियाओ पिंग थ्योरी को फॉलो किया जाता है।
2012 में सत्ता में आए थे जिनपिंग…
– चीन में इस बैठक से पहले 11 से 14 अक्टूबर तक सीपीसी की सेंट्रल कमेटी की बैठक हुई। इसमें जिनपिंग ने अपने कई करीबियों को पार्टी पदाधिकारी बनाया है।
– जिनपिंग 2012 में सत्ता में आए थे। तब से उनका कद चीन में काफी बढ़ गया है। जिनपिंग को ‘कोर लीडर ऑफ चाइना’ का टाइटल मिला है।
140 करोड़ वाले देश में 200 लोग चुनते हैं राष्ट्रपति
– सीपीसी नेशनल कांग्रेस में जनरल सेक्रेटरी को चुनती है। वही दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन (1.40 अरब) की कमान संभालता है।
– सीपीसी में कुल 2,300 रिप्रेजेंटेटिव्स हैं। इस बार 2,287 रिप्रेजेंटेटिव्स ही कांग्रेस में शामिल होंगे। 13 रिप्रेजेंटेटिव्स को निकाल दिया दिया गया है।
– सीपीसी की सेंट्रल कमेटी में 200 मेंबर्स होते हैं। यही कमेटी पोलित ब्यूरो को चुनती है। इसके जरिए परमानेंट कमेटी को चुना जाता है।
– पोलित ब्यूरो में 24 मेंबर हैं, जबकि परमानेंट कमेटी में 7 मेंबर हैं। इन दोनों कमेटियों के पास सबसे ज्यादा पावर होती है।
कम उम्र के नेताओं को कोर टीम में मिलेगी जगह
– 19वीं नेशनल कांग्रेस में शी जिनपिंग अगले 5 सालों के लिए चीनी पॉलिसी की दिशा और दशा को लेकर रिपोर्ट पेश करेंगे।
– पोलित ब्यूरो और परमानेंट कमेटी में नए लोगों के आने के आसार हैं। उम्मीद है, सीपीसी में फ्यूचर के नए लीडर्स को जगह मिलेगी।
– सीपीसी ने अहम पदों के लिए एज लिमिट तय की है। ऐसे में ज्यादातर पोलित ब्यूरो मेंबर्स हट जाएंगे, क्योंकि वो 68 की उम्र पार कर चुके हैं।
– इसमें एंटी करप्शन एजेंसी के चीफ वॉन्ग किशान भी शामिल हैं। हालांकि, वॉन्ग जिनपिंग के अहम मददगार हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि उन्हें पोस्ट पर बने रहने दिया जा सकता है।
जिनपिंग ने 5 साल में 10 लाख करप्ट ऑफिसर्स पर कार्रवाई हुई
– जिनपिंग ने 5 साल से एंटी करप्शन कैम्पेन चला रखा है। इसमें 10 लाख करप्ट ऑफिसर्स पर कार्रवाई की गई है।
– ‘शी’ नाम से चीन में एक आंदोलन भी हुआ, जिससे जिनपिंग की पॉपुलैरिटी काफी बढ़ी। अब लोग उन्हें प्यार से ‘शी दादा’ भी कहते हैं।
– इंटरनेशनल लेवल पर साउथ चायना सी का एक्सपेंशन और ‘वन बेल्ट वन रोड’ जिनपिंग की अहम कामयाबी रही है।
– उनकी अगुआई में चीन ने दुनिया के सामने खुद को ऑप्शनल सुपर पावर के रूप में पेश किया है। साउथ कोरिया के खिलाफ भी उन्होंने कड़े कदम उठाए हैं।
कम्युनिस्ट पार्टी 68 साल से सरकार में
– कम्युनिस्ट पार्टी चीन में 68 साल से सरकार में है। पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसकी ताकत में लगातार इजाफा हुआ है।
पहली कांग्रेस: 1921 में बेहद गोपनीय तरीके से शंघाई में हुई थी। इसमें कम्युनिस्ट नेता माओ त्से तुंग भी मौजूद थे, हालांकि तब वह बहुत यंग थे।
जब माओ बने नेता: 7वीं कांग्रेस 1945 में उस वक्त बुलाई गई, जब चीन-जापान की जंग खत्म होने ही वाली थी। कम्युनिस्ट पार्टी के गढ़ यनान में यह मीटिंग हुई। इसमें माओ सुप्रीम लीडर के तौर पर उभरे। इसी कांग्रेस में माओ के ‘विचारों’ को पार्टी की विचारधारा का आधार बनाया गया।
कल्चरल रेवोल्यूशन: 9वीं नेशनल कांग्रेस 1969 में हुई। यह वह दौर था, जब चीन में कल्चरल रेवोल्यूशन अपने पीक पर थी। सत्ता पर अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए माओ ने इस क्रांति का इस्तेमाल किया था।
चीनी सोशलिज्म:1982 में 12वीं कांग्रेस हुई। इसमें चीनी नेता तंग शियाओफिंग ने चीनी सोशलिज्म का प्रपोजल रखा। इससे चीन में इकोनॉमिक रिफॉर्म्स का रास्ता तैयार हुआ। देश पूरी तरह से कम्युनिस्ट आइडियोलॉजी से कैपिटलिज्म की तरफ बढ़ा।
कैपिटलिस्ट्स को जगह: 2002 में 16वीं कांग्रेस हुई। इसमें फॉर्मली छोटे इंडस्ट्रियलिस्ट्स को पार्टी का मेंबर बनने की इजाजत दी गई।
जिनपिंग का उदय: 2007 में 17वीं कांग्रेस हुई। इसमें पांचवीं पीढ़ी के शी जिनपिंग और ली केकियांग को सीधे सीपीसी की परमानेंट कमेटी का मेंबर बनाया गया, जबकि उस वक्त वे पार्टी के 25 मेंबर वाले पोलित ब्यूरो के मेंबर भी नहीं थे।

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