Published On: Tue, Oct 24th, 2017

सेना में फर्जी तरीके से भर्ती कराने वाला दलाल अरेस्ट, 1991 में गोरखा रेज‍िमेंट से हुआ था बर्खास्त

लखनऊ.यूपी एटीएएस ने सोमवार को भारतीय सेना में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती एक नेपाली युवक द‍िलीप ग‍िर‍ि को अरेस्ट क‍िया था। पूछताछ में उसने फर्जी तरीके से सेना में नौकरी द‍िलाने वाले एक दलाल बहादुर खत्री पुत्र स्व. भीम बहादुर का नाम ल‍िया था, ज‍िसे देर रात यूपी एटीएस ने वाराणसी से अरेस्ट कर ल‍िया है। ये शख्स भी नेपाल का रहने वाला है।
1982 में गोरखा रेजि‍मेंट में हुआ था भर्ती…
-आईजी एटीएस असीम अरुण ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, चंद्र बहादुर खत्री सेना का बर्खास्त सिपाही है। 1982 में गोरखा रेजि‍मेंट गोरखपुर से भर्ती हुआ था और 1991 में बर्खास्त कर दिया गया।
-बर्खास्तगी के बाद चंद्र बहादुर वाराणसी सेना रेजिमेंट के आसपास किराए का मकान लेकर रहने लगा। नेपाल से सेना में भर्ती होने के लिए आने वाले युवक इसके लक्ष्य पर रहते थे।
-39 GTC सेना रेजिमेंट वाराणसी में नेपाल से आने वाले युवकों से संपर्क कर स्थानीय प्रमाण पत्र, आवास शैक्षिक प्रमाण पत्र आदि के फर्जी प्रमाण पत्रों को बनवाकर दलाली के पैसे लेता था और उन्हें सेना में भर्ती कराने का काम करता था।
-चंद्र बहादुर साल 2010 में फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में थाना चेतगंज वाराणसी से जेल जा चुका है। इसके विरुद्ध फर्जी दस्तावेज बनाने और शस्त्र अधिनियम के संबंध में दो मुकदमें वाराणसी थाना चेतगंज में दर्ज हैं।
-इसके प‍िता भीम बहादुर भी सेना के गोरखा रेजि‍मेंट में सिपाही से सेवानिवृत्त कर्मी रहा है।
-सोमवार को पकड़ा गया दिलीप गिरी का वास्तविक नाम विष्णुलाल भट्टा राय को भी सेना में भर्ती होने के लिए इसी ने ही फर्जी प्रमाण पत्र आदि उपलब्ध कराए थे।
-दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों दिलीप और चंद्र बहादुर से पूछताछ जारी है। इससे जुड़े अन्य लोंगो की गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
-एटीएस के निरीक्षक विजय मल यादव द्वारा दोनों को आज संबंधित न्यायालय में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड लिया जाएगा।
39 गोरखा राइफल्स में भर्ती हुआ था द‍िलीप ग‍िर‍ि
-एटीएस आईजी असीम अरूण ने बताया, यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि वाराणसी में हुई सेना की भर्ती में कुछ विदेशी लोग गलत नाम और पते से भर्ती हो गए हैं।
-गोपनीय रूप से जांच की गई तो तीन नाम प्रकाश में आए, जो 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर वाराणसी से गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए थे। तीनों के चरित्र प्रमाण पत्र नकली हैं और ये लोग किसी अन्य की पहचान पर भर्ती हो गए हैं।
-यह एक आइडेंटी थीफ का प्रकरण भी है, क्योंकि तीन में से दो व्यक्ति की पहचान के असली व्यक्ति अपने पते पर रह रहे हैं। तीसरे द्वारा प्रयोग की गई पहचान की जांच जारी है।
-बीते एक अक्टूबर 2017 को थाना एटीएस लखनऊ में मुकदमा अपराध संख्या-14/2017 धारा 420, 467, 468, 471 भादवि पंजीकृत किया गया था। जिसकी विवेचना इंस्पेक्टर विजय मल द्वारा की जा रही है। तीनों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य संकलन किया गया तो आरोप की पुष्टि हुई।
-इसके बाद 16 अक्टूबर 2017 को तीनों अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय द्वारा एनबीडब्ल्यू जारी किया गया।
-23 अक्टूबर 2017 को दिलीप गिरि से वाराणसी में पूछताछ की गई तो उसने जुर्म स्वीकार करते हुए बताया क‍ि उसका असली नाम विष्णु लाल भट्टाराय उर्फ जीवन क्षत्रिय पुत्र हरिलाल भट्टाराय निवासी देवड़ा-द्वितीय थाना देवड़ा जिला रूपनदेई, नेपाल है।
-उसे वाराणसी के कैंट क्षेत्र से एटीएस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है और लखनऊ न्यायालय में मंगलवार को पेश किया जाएगा। फ‍िर उसे पुलिस रिमांड पर लिए जाने के लिए आवेदन किया जाएगा।
5 लाख रुपए देकर सेना में हुआ था भर्ती
-एटीएस की पूछताछ में पकड़े गए विष्णुलाल ने बताया, दलाल ने उससे 5 लाख रुपए लेकर भर्ती कराया है। एटीएस ने दलाल के बारे में विस्तृत जानकारी कर उसकी तलाश शुरू कर दी। इसके बाद दलाल बहादुर खत्री को देर रात ग‍िरफ्तार कर ल‍िया गया।
-एटीएस अफसरों ने बताया, सेना के सहयोग से शेष दो अभियुक्त शिवांश बालियान (पोस्टिंग 4/3 गोरखा राइफल बीएचयूजे) और मनोज कुमार बस्नेत (पोस्टिंग 2/3 गोरखा राइफल न्यू जलपाईगुरी बेस्ट बंगाल) जोकि अवकाश पर हैं। तलाश कर पूछताछ और अरेस्टिंग की जानी है। इनसे जानना होगा कि इनकी असली पहचान क्या है और यह क्यों फर्जी पहचान पर भर्ती हुए।

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