Published On: Sun, Jan 7th, 2018

श्मशान ले जाते समय जिंदा हो गई ये महिला

भोपाल।मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है। जहां बच्ची को जन्म देने के बाद अस्पताल में मां को मृत घोषित कर दिया गया। परिजन बॉडी घर ले आए और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। जैसे ही शव को अर्थी पर लिटाया गया तभी बॉडी में हरकत हुई। घर वाले उसे फिर से एंबुलेंस में लेकर छतरपुर जिला अस्पताल भागे, लेकिन रास्ते में ही एम्बुलेंस में लगे सिलेंडर की आक्सीजन खत्म हो गई। इससे महिला की हालत खराब हुई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। डर के मारे एम्बुलेंस चालक महिला को स्ट्रेचर पर उतारकर एम्बुलेंस लेकर भाग खड़ा हुआ। जिला अस्पताल में एक बार फिर महिला को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।क्या है मामला…

-नगर के कस्बा के वार्ड नंबर 12 कुसमा निवासी अरविंद अहिरवार की 28 वर्षीय पत्नी भागवती को शुक्रवार दोपहर 12 बजे डिलिवरी के लिए भर्ती कराया गया। दोपहर करीब एक बजे उसने स्वास्थ्य बच्ची को जन्म दिया। डिलिवरी के कुछ घंटों बाद शाम करीब 5 बजे भागवती की सांस बंद हो गई। तो परिजन उसे लेकर घर चले गए। चूंकि उसके शरीर में थोड़ी गर्मी बाकी थी,इसलिए महिलाओं ने शरीर की मालिश की और आग से सेंका तो उसकी सांस लौट आई।

सांस लौटी तो भागे अस्पताल

-डिलिवरी कराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महाराजपुर आई प्रसूता की डिलेवरी के बाद सांस रुक जाने के बाद परिजन घर ले गए। घर पहुंचते ही सांस लौटी तो परिजन जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, लेकिन यहां पहुंचने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में मृतिका के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी पत्नी की जान बच सकती थी।

दूसरी बार फिर से डॉक्टरों ने घोषित किया डेड

-परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सांस लौटते ही परिजन 108 एंबुलेंस से उसे लेकर जिला चिकित्सालय आए, लेकिन जिला चिकित्सालय पहुंचते ही इमरजेंसी पर तैनात डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। जहां जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे एक बार फिर मृत घोषित कर दिया। तो परिजनों में फिर हाहाकार मच गया। और अस्पताल में हंगामा कर लाश न ले जाने की बात और मौत के लिये अस्पताल स्टाफ और डाक्टरों को जिम्मेदार ठहराने लगे।

-मृतिका प्रसूता के पति अरविंद ने बताया कि अस्पताल में डाक्टर मौजूद नहीं था, अगर समय पर इलाज मिल जाता तो जान बच सकती थी। उसने बताया कि एंबुलेंस में भी आक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है।

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