Published On: Fri, Apr 6th, 2018

हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का बजट सत्र, जनता के 190 करोड़ खर्च!

बजट सत्र में विभिन्न मुद्दों पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही क्षेत्रीय दलों द्वारा हंगामा किये जाने के कारण लोकसभा और राज्यसभा का कामकाज निराशाजनक रहा है तथा इस सत्र में लोकसभा में उत्पादकता मात्र 23 प्रतिशत और राज्यसभा की 28 प्रतिशत रही। इस सत्र को चलाने में अब तक 190 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए हैं। इसमें सांसदों के वेतन-भत्तों, अन्य सुविधाओं और कार्यवाही से संबंधित इंतजाम पर खर्च शामिल है. लेकिन इतनी भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद संसद को सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सका। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक स्थगित किये जाने के बाद आज यहां संवाददाताओं से कहा कि 29 जनवरी से शुरू हुये इस बजट सत्र के दोनों चरणों में लोकसभा की 29 और राज्यसभा की 30 बैंठकें हुयी है।

पहले चरण में लोकसभा की सात और राज्यसभा की आठ बैठकें हुयी थी। उन्होंने कहा कि पहले चरण में लोकसभा की उत्पादकता 134 प्रतिशत और राज्यसभा की 96 प्रतिशत रही थी। लेकिन दूसरे चरण में कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की उत्पादकता मात्र 4 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता आठ प्रतिशत रह गयी। इस तरह कुल मिलाकर बजट सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 23 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता 28 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान लोकसभा में वित्त विधेयक 2018 सहित पांच विधेयक पेश किये और पांच ही विधेयक पारित भी किये गये। राज्यसभा में मात्र एक विधेयक पारित किया। धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पारित वित्त विधेयक 2018, विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2018, विनियोग (संख्या 3) विधेयक 2018 और उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2018 को संविधान के अनुच्छेद 109 के खंड पांच के तहत लोकसभा से पारित होने के 14 दिनों के बाद संसद के दोनों सदनों से पारित मान लिया जाता है।

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