Published On: Wed, Oct 11th, 2017

लालू परिवार अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है

करीब दो दशक पहले लालू प्रसाद यादव ने बिहार की राजनीति में नारा दिया थाöजब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में लालू। इसके साथ यह भी कहा था कि बिहार की राजनीति से उन्हें 20 वर्ष तक कोई नहीं हटा सकता। यह दोनों बातें लालू ने तब कही थीं जब वह चारा घोटाले के कारण जेल भी गए थे। उस संकट से तो लालू ने खुद को बाहर निकाल लिया था और बिहार की राजनीति में एक मजबूत ध्रुव बने रहे। लेकिन वर्ष 2017 में यह सवाल ज्यादा मजबूती से सामने आया है, जब लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। जहां लालू और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में फंस चुका है, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी लालू अब नीतीश-भाजपा के गठबंधन के सामने सामाजिक समीकरणों के तानेबाने में फंसते दिख रहे हैं। जांच एजेंसी सीबीआई से मिली जानकारी के मुताबिक लालू और उनके परिवार के खिलाफ चल रही जांच अंतिम चरणों में है। रेलवे और चारा घोटालों से जुड़ी जांच इसी साल हर हाल में पूरी हो जाएगी और बहुत जल्द इन मामलों में अंतिम चार्जशीट भी दायर होने लगेगी। चारा घोटाला मामले में तो सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय डेडलाइन के अनुसार इसी साल फैसला भी आ जाएगा। सीबीआई का दावा है कि इन दोनों मामलों में लालू के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। इसके अलावा ईडी से जुड़ी जांच भी अगले कुछ महीनों में अंतिम मुकाम पर पहुंचने वाली है। लालू यादव भले ही आरआरसीटीसी के दो होटलों की लीज देने के फैसले को अधिकारियों पर टालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसियों के पास मौजूद सबूतों के बाद उनका बचना आसान नहीं होगा। सीबीआई के हाथ रेल मंत्रालय की नोटशीट लगी है जिससे साफ है कि दोनों होटलों को पटना के चाणक्य होटल के मालिकों को लीज पर देने का निर्देश खुद लालू यादव ने दिया था। होटल लीज पर देने के फैसले में लालू यादव की संलिप्तता ही नहीं, बल्कि बदले में पटना में मॉल की जमीन हासिल करने का सबूत भी जांच एजेंसी के पास है। लालू यादव होटल के लीज और पटना की जमीन को अलग-अलग बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीबीआई का कहना है कि यह महज संयोग नहीं है कि होटल को लीज पर देने का फैसला और सस्ते में काफी महंगी जमीन को उनके सहयोगी मंत्री प्रेम चन्द गुप्ता की पत्नी के नाम रजिस्ट्री एक ही समय में हुई है। यही नहीं, बाद में यह जमीन सीधे उनके बेटे तेजस्वी और पत्नी राबड़ी देवी की कंपनी के पास आ गई। यह सीधे तौर पर आपसी मिलीभगत से किया गया लेनदेन का मामला है। लाख टके का सवाल ः क्या लालटेन की लौ बचा पाएंगे लालू?

 

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