Published On: Sun, May 13th, 2018

नासा के शोध ने दिल्ली की जहरीली हवा की वजह का किया खुलासा, अक्टूबर-नवंबर माह में सबसे अधिक प्रदूषण

नासा के वैज्ञानिको ने नए शोध में बताया है कि हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की वजह से देश की राजधानी दिल्ली की हवा में प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ गया है। मानसून के बाद हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की वजह से नई दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर माह में पीएम लेवल 2.5 तक पहुंच गया था। पंजाब व हरियाणा से आने वाली हवा में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है, जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

pollution

95 लाख वाहन भी जिम्मेदार

शोध के अनुसार जब पराली जलाई जा रही थी तो उससे पहले हवा में प्रदूषण 50 माइक्रोग्राम प्रति क्युबिक मीटर था, जोकि बाद में बढ़कर 300 तक पहुंच गया था। 2016 में पराली जलाने के समय हर औसतन प्रदूषण का स्तर 550 ग्राम तक पहुंच गया था। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण स्तर 2016 में किस स्तर तक पहुंच गया था। शोध में यह बात भी सामने आई है कि अन्य स्रोत के द्वारा प्रदूषण काफी बढ़ा है। तकरीबन 95 लाख गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से भी नासा के शोध ने सतर्क किया है।

पराली जलाने से हवा काफी  प्रदूषित

नासा के शोध से सरकार को इस बात की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी कि कैसे वायु प्रदूषण की वजहों को कम करते हुए लोगों को स्वस्थ्य हवा सांस लेने के लिए मुहैया कराया जाए। यह पहला वैज्ञानिक शोध है जिसमे सैटेलाइट के जरिए 15 साल के आंकड़ों को जारी किया गया है। यह आंकड़ा 2002-2016 के बीच का है। इसमे कहा गया है कि अक्टूबर व नवंबर माह में हवा में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है, जिसकी बड़ी वजह है खेतों में पराली का जलाया जाना। यह आंकड़े दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित अमेरिका के दूतावास के पास से इकट्ठा किया गया है।

पिछले वर्षों में बढ़ा है  प्रदूषण

वैज्ञानिकों ने प्रदूषित हवा के मार्ग का भी अध्ययन किया है, जिसके लिए नेशनल ओसिअनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन मॉल का इस्तेमाल किया गया है, जिसमे गेंहू और धान की कटाई के बाद खेत में लगाई जाने वाली आग से होने वाले प्रदूषण की जानकारी दी गई है। मानसून के बाद पीएम लेवल 2.5 तक पहुंच जाता है, जोकि 2013, 2014, 2015, 2016 में लगातार बढ़ते हुए 10,7,12,13 फीसदी तक पहुंच गया है।

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