Published On: Sat, Oct 21st, 2017

भारत को आर्म्ड प्रिडेटर ड्रोन देने पर विचार कर रहा है US, जल्द हो सकता है फैसला

  • अमेरिका इंडियन एयरफोर्स को प्रिडेटर आर्म्ड ड्रोन्स देने पर विचार कर रहा है। एयरफोर्स ने सरकार के जरिए इस साल के शुरू में 100 प्रिडेटर ड्रोन्स खरीदने की रिक्वेस्ट की थी। अब अमेरिका के एक टाॅप अफसर ने कहा है कि उनका देश भारत की इस जरूरत को पूरा करने के लिए विचार कर रहा है। आने वाले वक्त में इन डील पर फैसला लिया जा सकता है। यह डील करीब 8 बिलियन डॉलर की होगी। बता दें कि अमेरिका जल्द ही इंडियन नेवी को गार्डियन ड्रोन की सप्लाई शुरू करने जा रहा है। यह डील जून में मोदी की अमेरिका विजिट के दौरान फाइनल की गई थी।

    प्रिडेटर ड्रोन पर अमेरिका ने क्या कहा?

    – न्यूज एजेंसी से बातचीत में डोनाल्ड ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के एक अफसर ने कहा- भारत अपनी फौज का मॉर्डनाइजेशन करना चाहता है। हम प्रिडेटर आर्म्ड ड्रोन्स की उनकी मांग पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
    – ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने पहली बार भारत को अहम डिफेंस पार्टनर बनाया था। इसके बाद ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन भी इसी रास्ते पर चल रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका भारत को प्रिडेटर ड्रोन देने के लिए तैयार हो जाएगा।
    – इस अमेरिकी अफसर ने कहा- यूएस और इंडियन नेवी पाइरेसी के खिलाफ मिलकर कार्रवाई कर रही हैं। समुद्र में हम नेवीगेशन फ्रीडम चाहते हैं।

    इसी साल शुरू हुई थी बातचीत

    – भारत ने एयरफोर्स के लिए जनरल एटॉमिक्स प्रिडेटर सी. एवेंचर एयरक्राफ्ट की मांग अमेरिका से की है। एयरफोर्स इसकी 100 यूनिट चाहती है।
    – अमेरिकी अफसर ने कहा- हमारे बीच जिस तरह का भरोसा और बेहतर रिश्ते हैं, उससे डिफेंस रिलेशन बहुत आगे जाने वाले हैं। हम एक-दूसरे की बुनियादी जरूरतों को समझते हैं।
    – मोदी और ट्रम्प के बीच 26 जून को व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई थी। इस दौरान नेवी के लिए 22 ड्रोन पर डील हुई थी। इन ड्रोन के जरिए इंडियन नेवी हिंद महासागर में सर्विलांस सिस्टम को बहुत बेहतर कर पाएगी। उसको रियल टाइम अपडेट मिलेगा।
    – ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के इस अफसर के मुताबिक- भारत काफी वक्त से अपनी फोर्सेस का मॉर्डनाइजेशन करना चाहता है। उसको हाईटेक डिफेंस इक्युपमेंट्स की जरूरत है। अमेरिका आने वाले वक्त में इस काम में उसकी मदद के लिए तैयार है।

    प्रिडेटर ड्रोन में क्या खास?

    – प्रिडेटर सी. एवेंजर में टर्बोफैन इंजिन और स्टील्थ एयरक्राफ्ट के तमाम फीचर हैं। ये अपने टारगेट पर सटीक निशाना लगाता है। स्टोर से ऑटोमैटिक लोडिंग सॉल्युशन सिस्टम भी इसमें मौजूद है। राडार से बचने के लिए इसमें एस शेप्ड एक्जास्ट भी लगाए गए हैं।

    भारत को कैसे होगा फायदा?

    – कश्मीर के पहाड़ी इलाकों पर नजर रखने के लिए इंडियन आर्मी फिलहाल, इजराइल से खरीदे गए ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन, अमेरिका के प्रिडेटर जेट की रफ्तार से उड़ते हैं। इन ड्रोन्स के मिलने के बाद भारत ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि चीन पर भी आसानी से नजर रख सकेगा। डिफेंस के लिहाज से देखें तो सर्विलांस सिस्टम के मामले में भारत इन दोनों देशों से काफी आगे निकल जाएगा।
    – नया प्रिडेटर अपने बेस से उड़ान भरने के बाद 1800 मील (2,900 किलोमीटर) उड़ सकता है। 50 हजार फीट की ऊंचाई पर 35 घंटे तक रह सकता है। इसके अलावा इस पर 6500 पाउंड का पेलोड (भार) रखा जा सकता है। इन्हें नेक्स्ट जेनरेशन ड्रोन कहा जाता है। तय वक्त में जमीन और समंदर दोनों में मिलिट्री मिशन को अंजाम दे सकता है।

    टिलरसन ने क्या कहा था?

    – अमेरिकी फॉरेन मिनिस्टर रैक्स टिलरसन ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत हमारा अहम डिफेंस पार्टनर है। दोनों देशों की नेवी कई मामलों में मिलकर काम करती हैं। यही वजह है कि अमेरिका अपने कीमती गार्डियन ड्रोन इंडियन नेवी को देने के लिए तैयार हुआ है।
    – टिलरसन ने कहा था- हम जानते हैं कि ग्लोबल सिक्युरिटी में भारत कितना अहम रोल निभा सकता है। हम उसको ज्यादा बेहतर ताकत से लैस होता देखना चाहते हैं। टिलरसन जल्द ही भारत आने वाले हैं।
    – टिलरसन ने प्रिडेटर ड्रोन पर कुछ नहीं कहा। लेकिन, बताया कि अमेरिका गार्डियन ड्रोन, एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी, वर्टिकल लिफ्ट प्रोग्राम, एफ-18 और एफ-16 और दूसरे सेक्टर की डील पर विचार कर रहा है।
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    भारत ने एयरफोर्स के लिए जनरल एटॉमिक्स प्रिडेटर सी. एवेंचर एयरक्राफ्ट की मांग अमेरिका से की है। एयरफोर्स इसकी 100 यूनिट चाहती है।

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