Published On: Tue, Oct 24th, 2017

PAK से 3 गुना ज्यादा रोड रनवे बनाएगा भारत, 2 साल में तीसरी कामयाब टेस्टिंग

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार को इंडियन एयरफोर्स का सबसे बड़ा टचडाउन हुआ। 17 फाइटर प्लेन्स बारी-बारी से एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से पर उतारे गए। इनमें बड़ा एयरक्राफ्ट हरक्यूलिस भी शामिल था। बता दें कि भारत में 12 हाईवे को जंग के वक्त फाइटर प्लेन्स की लैंडिंग और टेकऑफ में इस्तेमाल करने लायक बनाने की योजना है। ऐसा हुआ तो भारत के पास पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा रोड रनवे हो जाएंगे। पाकिस्तान के पास अभी चार रोड रनवे हैं। उसने पिछली बार 2016 में उड़ी हमले के बाद इस्लामाबाद में हाईवे पर फाइटर प्लेन उतारे थे। वहीं, भारत 2015 से अब तक तीन बार इस तरह की कामयाब टेस्टिंग कर चुका है। दुनिया में दूसरे वर्ल्ड वॉर के समय से इस तरह के एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं। 1939 में विंटर वॉर के दौरान फिनलैंड ने जमी हुई झील पर ही एयरस्ट्रिप बना दिया था।
 
– पाकिस्तान के खिलाफ 1971 की जंग के दौरान छोटे फाइटर प्लेन जेनेट को कोलकाता की सड़क पर उतारा गया था। हालांकि, इसका सामरिक महत्व नहीं था। इसके बाद 2015 से भारत ने इसकी ऑफिशियल टेस्टिंग शुरू की।
1) पहली बार यमुना एक्सप्रेस-वे पर उतरे मिराज
21 मई 2015 को ‘मिराज-2000 ‘ को यमुना एक्सप्रेस-वे पर उतारा गया था। यह पहला मौका था जब इंडियन एयरफोर्स ने रोड पर फाइटर प्लेन उतारा था। एयरफोर्स के एक हेलिकॉप्टर ने भी एक्सप्रेस वे पर लैंडिंग की। इसके लिए ग्रेटर नोएडा और आगरा को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था।
2) दूसरी कोशिश में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे से हुई शुरुआत
21 नवंबर 2016 को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के इनॉगरेशन के वक्त मिराज और सुखोई ने यहां टच डाउन किया था। 302 किलोमीटर का यह एक्सप्रेस-वे रिकॉर्ड 22 महीने में बन कर तैयार हुआ था। यह देश का सबसे लंबा सिक्स लेन एक्सप्रेस वे है, जिसे एट लेन तक किया जा सकता है।
3) तीसरी कोशिश में सबसे बड़ा टचडाउन
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर एयरफोर्स का सबसे बड़ा टचडाउन 24 अक्टूबर 2017 को हुआ। 17 फाइटर प्लेन्स को यहां लाया गया। कैरियर एयरक्राफ्ट सुपर हरक्यूलिस की लैंडिंग हुई। इसमें से गरुड़ कमांडो एक्सप्रेस-वे पर उतरे।
पाकिस्तान के पास कितने रोड रनवे, भारत की क्या है प्लानिंग?
– पाकिस्तान में दो हाईवे पर फाइटर प्लेन लैंड कराए जा सकते हैं। इन पर चार रनवे हैं। एम-1 हाईवे पेशावर को इस्लामाबाद से जोड़ता है। एम-2 हाईवे लाहौर को इस्लामाबाद से जोड़ता है। पाकिस्तान ने 2000 में इन हाईवेज पर फाइटर प्लेन की लैंडिंग का ट्रायल किया था। हाईवे पर 2-2 इमरजेंसी रनवे सेक्शन बनाए गए थे।
– 18 सितंबर को उड़ी अटैक के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। जंग जैसे हालात थे। तब पाक सेना ने इस्लामाबाद में हाईवे से फाइटर प्लेन उड़ाए थे।
पाक से तीन गुना ज्यादा रोड रनवे भारत में होंगे
– भारत में 22 हाईवे पर रनवे तैयार करने का प्लान है। इनमें से 12 हाईवे पर रनवे बनाने की एयरफोर्स मंजूरी दे चुकी है। इन हाईवे पर कुछ किमी हिस्से को एयर स्ट्रिप की तरह तैयार किया जाना है। 12 रनवे तैयार हो जाने पर भारत के पास पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा रोड रनवे की कैपेसिटी होगी।
इन 12 हाईवे पर बनेंगे रोड रनवे
– जमशेदपुर-बालासोर हाईवे और छत्तरपुर-दीघा हाइवे। दोनों ओडिशा से सटे हैं।
– बिहार में किशनगंज-इस्लामपुर हाईवे। दिल्ली-यूपी का दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे। जम्मू कश्मीर में बिजबेहड़ा-चिनार बाघ हाईवे।
– उत्तराखंड में रामपुर-काठगोदाम हाईवे। उत्तर प्रदेश में लखनऊ-वाराणसी हाइवे। गुजरात का द्वारका-मालिया हाईवे।
– पश्चिम बंगाल का खड़गपुर-क्योंझर हाईवे। असम में मोहनबारी-तिनसुकिया हाईवे। आंध्र प्रदेश का विजयवाड़ा-राजामुंदरी हाईवे। तमिलनाडु का चेन्नई-पुड्‌डुचेरी हाईवे। राजस्थान का फलौदी-जैसलमेर हाईवे।
पाक ने पहली बार कब किया रोड रनवे का इस्तेमाल?
यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ हल में स्ट्रैटजिक और न्यूक्लीयर स्टडीज के एक्सपर्ट जफर खान ने अपनी किताब ‘पाकिस्तान न्यूक्लीयर पॉलिसी : ए मिनिमम क्रेडिबल डिटेरेंस’ में इसका जिक्र किया है। खान के मुताबिक, कारगिल जंग में हार के बाद पाकिस्तानी एयरफोर्स इमरजेंसी रनवे के बारे में विचार कर रही थी। इसी योजना के तहत उसने 2000 में एम-2 मोटरवे पर एफ-7पी फाइटर, सुपर मुशाक ट्रेनर और सी-130 फाइटर उतारे थे।
पाक की दूसरी कोशिश में टेक-ऑफ और री-फ्यूलिंग भी हुई
खान के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2010 में बड़े सैन्याभ्यास के तहत इसी मोटरवे के एक हिस्से को अपनी एयरफोर्स के लिए पूरी तरह रोड रनवे बना दिया। तब पाकिस्तान ने यहां मिराज-III और एफ-7पी फाइटर प्लेन न सिर्फ उतारे, बल्कि उनकी री-फ्यूलिंग कराते हुए दोबारा टेक-ऑफ भी कराया।
भारत को क्यों पड़ी रोड रनवे की जरूरत?
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स के कुछ प्लेन आगरा तक आ गए थे। हालांकि, वे बम बरसाने में नाकाम रहे थे। इंडियन एयरफोर्स ने उन्हें खदेड़ दिया था। तभी से यह माना जाता रहा है कि देश के अंदर फाइटर प्लेन उतारने के लिए ऑप्शन्स होने चाहिए।
भारत से पहले किन देशों के पास है रोड रनवे?
– चीन, पाकिस्तान, स्वीडन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, ताइवान, पाेलैंड, फिनलैंड, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया, साउथ कोरिया और सिंगापुर में वहां की एयरफोर्स के लिए पहले से रोड रनवे बने हैं।
– स्पेन के पास स्थित ब्रिटिश इलाका जिब्राल्टर एक प्रायद्वीप (आइलैंड) पर स्थित है। इसका इलाका सिर्फ 6.8 वर्ग किलोमीटर है। यहां का रनवे शहर की मुख्य सड़क को चीरते हुए गुजरता है। हफ्तेभर में सिर्फ 30 उड़ानें यहां से जाती हैं। एयरफोर्स के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
अमेरिका में हर हाईवे पर एयर स्ट्रिप
– सेकंड वर्ल्ड वॉर के आखिर में जर्मनी में नाजियों ने रीकसाउतोबान हाईवे को एयरस्ट्रिप की तरह इस्तेमाल किया था। जंग में इस स्ट्रैटजी का सबसे कामयाब एक्सपेरिमेंट इजरायल का रहा। 1967 में 6 दिन में मिस्र को हराया। 18 एयरबेस तबाह किए।
– अमेरिका में नियम है कि हर हाईवे में 8 किमी की दूरी पर 2 किमी लंबी एयर स्ट्रिप बनती है ताकि आपात स्थिति में आसानी से निपटा जा सके। चीन ने पहली बार 1989 में हाईवे पर प्लेन उतारा था। तब से वो लगातार इस तरह की प्रैक्टिस कर रहा है।
– ऑस्ट्रेलिया में रॉयल फ्लाइंग डॉक्टर सर्विस भी है, जो मरीजों तक पहुंचने के लिए इस तरह की पट्टी का इस्तेमाल करती है।
फिनलैंड ने जमी झील पर उतारे थे फाइटर प्लेन
1939-40 के विंटर वॉर के दौरान फिनलैंड ने जमी झील का इस्‍तेमाल अपने फाइटर प्‍लेन की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए किया था। तब फिनलैंड सोवियत संघ से जंग लड़ रहा था। पिछले दो साल में भी फिनलैंड ने कई हाईवे स्ट्रिप बनाए हैं।

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