Published On: Thu, Mar 29th, 2018

CWG 2018 : पिता बेचते हैं लंगोट, बेटी जीतती है पदक

 

नाम: दिव्या काकरान

उम्र: 19

खेल: कुश्ती

कैटेगरी: 68 किग्रा

पिछला कॉमनवेल्थ गेम्स प्रदर्शन : पहली बार भाग ले रही हैं

मुजफ्फरनगर जिले के छोटे से गांव पुरबालियान में पैदा हुईं दिव्या के लिए कुश्ती की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना बेहद मुश्किल था. एक तो रूढ़िवादी परिवार और उस पर लड़कियों को लेकर गांव के लोगों की तंग सोच. ऐसे में दिव्या के लिए दंगल में उतरना ही किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था. पिता ने परिवार और समाज की परवाह किए बगैर बेटी को अखाड़े में डाला, लड़कों से भिड़ाया. पहलवानी की पहली ही आजमाइश में दिव्या ने अपने जबर्दस्त दांव से सबको हैरान कर दिया और तभी पिता ने तय कर लिया कि वह अपनी बेटी के हौसले को कामयाबी की मंजिल तक जरूर पहुंचाएंगे.

आठ साल की उम्र में दांव-पेंच सीखने शुरू कर दिए 

छह बार की भारत केसरी दिव्या ने पिछले साल पहली बार में ही सीनियर राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में खेलते हुए उत्तर प्रदेश की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया. महज आठ साल की उम्र में दिव्या ने कुश्ती के दांव-पेंच सीखने शुरू कर दिए पर कामयाब रेसलर बनने के लिए बेहतर ट्रेनिंग के साथ-साथ अच्छी डाइट भी जरूरी है, जबकि दिव्या का परिवार एक-एक पैसे के लिए तरस रहा था. पिता की नौकरी से गुजारा नहीं हुआ तो मां ने पहलवानों के लिए लंगोट बनाना शुरू किया जिसे बेचने के लिए पिता सूरजवीर दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अलग-अलग अखाड़ों में जाया करते थे. नौबत यहां तक आ गई कि बेटी को आगे बढ़ाने के लिए मां को अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रखना पड़ा. दिव्या ने जब इंदौर में पीला तमगा जीता उस समय भी सूरज बाहर लंगोट बेच रहे थे. दिव्या ने जीत के तुरंत बाद बाहर आकर पदक पिता के गले में डाल दिया. सूरजवीर कहते हैं कि यह पल मेरी जिंदगी का सबसे यादगार बन गया.

कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स हैं लक्ष्य

एशियन चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता दिव्या का अगला लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स हैं. वह इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. वह राष्ट्रीय स्तर पर 15 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पांच पदक जीत चुकी हैं. उन्होंने पिछले साल दिसंबर में जोहानसबर्ग कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था. दिव्या पिछले दो साल से नौकरी के लिए रेलवे के अलावा दिल्ली सरकार के चक्कर काट चुकी हैं लेकिन आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला. सूरज कहते हैं भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण के कहने पर दिव्या ने पिछले साल दिल्ली छोड़ उत्तर प्रदेश से खेलना शुरू किया है. प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने खिलाड़ियों के लिए बहुत सी घोषणाएं की हैं. उम्मीद है कि वे अपने प्रदेश की बिटिया को और धक्के नहीं खाने देंगे.

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