Published On: Sat, Aug 4th, 2018

हौसले को सलाम : देख नहीं सकते लेकिन खड़ी की अरबों की कंपनी

श्रीकांत, यह वह शख्स है जो प्रत्येक उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है जो जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं। 27 साल के श्रीकांत ने दृष्टिहीन होने के कारण अपने जीवन काल में बहुत सी समस्याओं का सामना किया है और इन्हें दूर करते हुए आज वह 450 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं। विश्वप्रसिद्ध MIT से ग्रैजुएॉ श्रीकांत ने 2012 में भारत लौटने के बाद बौलैंट की स्थापना की। यहीं उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बना।

बोलैंट इंडस्ट्रीज के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक स्थित 7 मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स हैं, जहां पर पत्तियों और इस्तेमाल किए गए कागज से ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग बनाई जाती है। 2012 से 20 प्रतिशत मासिक की दर से विकास कर रही बोलैंट इंडस्ट्रीज 7 फैक्ट्रियों से 10 करोड़ रुपए महीने की बिक्री होती है। कंपनी के स्टोर्स की एक मजबूत रिटेल चेन है। पिछले साल सितंबर में कंपनी की वैल्यू 413 करोड़ रुपए आंकी गई थी लेकिन श्रीकांत का लक्ष्य इसे 1,200 करोड़ रुपए तक पहुंचाना है। श्रीकांत को इस टार्गेट को वित्त वर्ष 2019 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है। कंपनी का टर्नओवर 150 करोड़ पहुंच जाएगा। उनकी कंपनी में 600 कर्मचारी हैं जिनमें से 40-50 प्रतिशत कर्मचारी डिफरेंटली एबल्ड हैं।

दृष्टिहीनता को कमजोरी न मानना ही श्रीकांत बोला की सफलता का राज है। बोलैंट इंडस्ट्रीज में रतन टाटा, सतीश रेड्डी, एस. पी. रेड्डी (रेड्डी लैबरेटरीज), श्रीनि राजू, चलामला सेट्टी और रवि मांथ जैसे दिग्गजों ने निवेश किया है।  बोलैंट इंडस्ट्रीज के सीईओ और फाउंडर श्रीकांत हंसते हुए कहते हैं, ‘किसी अन्य के लिए काम करना मेरे डीएनए में नहीं है। दिव्यांगता मन से होती है, शरीर से नहीं।’

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