Published On: Fri, Jan 5th, 2018

AAP के अंदर घमासान तेज, बड़े रार से विघटन की ओर बढ़ी पार्टी

दिल्‍ली की सत्‍ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के अंदर उपजा मतभेद गहराता जा रहा है। राज्‍यसभा के लिए उम्‍मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। अब यह लड़ाई घर के बाहर आ चुकी है। हालांकि, इस मामले में अभी भी अरविंद केजरीवाल मौन साधे हुए हैं। लेकिन सरकार के मंत्री और वरिष्‍ठ नेता आमने सामने आरोप और प्रत्‍याराेप लगा रहे हैं।

कारोबारियों सुशील व नारायणदास गुप्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित करने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) में घमासान बढ़ता जा रहा है। कई कार्यकर्ता खुलकर उनके विरोध में आ रहे हैं। वे अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछ रहे हैं कि कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना किस तरह से पार्टी के हित में है और पार्टी के लिए उनका क्या योगदान है। इन सवालों पर केजरीवाल मौन हैं।

वहीं गुरुवार को गोपाल राय ने कुमार विश्वास पर सीधे प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद केजरीवाल की सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचने के केंद्र में कुमार विश्वास थे। सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पार्टी के अंदर बड़ा बवाल हो सकता है। पार्टी के विघटन की आशंका भी जताई जा रही है।

राज्यसभा के लिए नाम घोषित होने के बाद नाराज कुमार विश्वास ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के निर्णयों के बारे में सच कहने के लिए उन्हें दंडित किया गया और उन्होंने शहादत को स्वीकार कर लिया है। वहीं आप के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने दावा किया कि पिछले वर्ष अप्रैल में नगर निगम चुनावों के बाद दिल्ली सरकार को गिराने का प्रयास किया गया।

उस षड्यंत्र के केंद्र में कुमार विश्वास थे। उन्होंने फेसबुक लाइव में कहा कि इस संबंध में कुछ विधायकों के साथ अधिकतर बैठकें उनके आवास में हुई। कपिल मिश्रा बैठक का हिस्सा थे और बाद में उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया।

गोपाल राय ने एक वीडियो का हवाला दिया, जिसे विश्वास ने जारी किया था। इसमें भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने केजरीवाल सरकार पर परोक्ष प्रहार किया था। राय ने कहा कि वीडियो के माध्यम से विश्वास ने निगम चुनावों में आप की संभावनाओं को खराब करने का प्रयास किया था। स्थानीय चुनाव में पार्टी भाजपा से हार गई थी। इससे पहले विश्वास ने ट्वीट किया था कि वीडियो में उन्होंने जो मुद्दे उठाए, उन पर वह पुनर्विचार नहीं करेंगे।

उल्टा पड़ा केजरीवाल का दांव 

दो कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल के गले की फांस बनता जा रहा है। केजरीवाल पार्टी के बाहर के लोगों के सीधे निशाने पर हैं ही, पार्टी के अंदर भी उनके इस फैसले को लेकर असंतोष है।

उन लोगों को नजरअंदाज किए जाने से भी कार्यकर्ता नाराज हैं, जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अपना सब-कुछ लगा दिया। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी की वजह से वे इसमें आए थे, लेकिन यहां नियम दरकिनार किए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो केजरीवाल और उनकी पार्टी को यह दांव महंगा पड़ सकता है। इस फैसले से कार्यकर्ता नाराज हैं, लेकिन वे खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

 

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