Published On: Mon, Oct 23rd, 2017

3 साल बाद फिर जागी कांग्रेस, कहीं फेर ना दे मोदी की उम्मीदों पर पानी

पिछले 2 महीनों से पूरे देश में कांग्रेसी नेताओं के तेवर तीखे हुए हैं। इसका कारण राजनैतिक जानकारों के हिसाब से कोई और नहीं, बल्कि कांग्रेस के दिग्गज और देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी हैं, जो पर्दे के पीछे रह कर कांग्रेस के नए रणनीतिकार बन गए हैं।

प्रणब मुखर्जी जैसे मंझे राजनीतिज्ञ का कांग्रेस का सलाहकार बनना पार्टी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। कांग्रेस को जीत के लिए जिस गुरू मंत्र की आवश्यक्ता थी वो शायद प्रणब मुखर्जी ने उन्हें दे दिया है और अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस आने वाले वक्त में एक बार फिर सत्ता की कुर्सी पर बैठी दिख सकती है।

सीनियर कांग्रेसी नेताओं की आवाज में धार
पंजाब केसरी अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस को दोबारा देश में खड़ा करने का बिड़ा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उठाया है औऱ उन्ही की बनाई गई रणनीति के कारण कांग्रेस के बड़े नेताओं के बयानों में तीखापन आया है। उदाहरण सिर्फ़ एक राज्य या रैली का नहीं है बल्कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राजस्थान के अध्यक्ष सचिन पायलट और हरिय़ाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा साहब, इन सब के बयानों में एक बार फिर धार दिखी है, जो 2014 चुनावों में मिली हार के बाद कहीं खो गई थी। करीब तीन साल बाद कांग्रेस पहली बार विपक्ष के रूप में दिखी है।

अपनी गलती सुधारेगी कांग्रेस
इसका एक कारण गुजरात चुनाव भी हैं क्योंकि दो दशकों के बाद कांग्रेस को बीजेपी के इस किले को भेदने का सपना साकार होता दिख रहा है। राहुल गांधी के भाषणों में भी इसका प्रभाव दिख रहा है। सिर्फ़ इतना ही नहीं, कहीं न कहीं राहुल गांधी का लगातार मंदिरों में जाना भी प्रणब मुखर्जी की सलाह के तौर पर ही देखा जा रहा है। सिर्फ़ गुजरात में ही राहुल गांधी करीब दर्जनभर मंदिर में दर्शन करके आए हैं। जिसका मतलब साफ है कि 12-13 सालों से कांग्रेस जिस वोट बैंक को नज़रअंदाज़ करने की गलती करती आई है अब उसे दोबारा अपने पाले में लाने की कोशिश है।

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