Published On: Fri, Oct 5th, 2018

जानें आखिर उत्तर बिहार क्यों है आतंकियों की फेवरेट जगह, क्‍या है टेरर कनेक्शन

 

बिहार में अक्टूबर 2013 में पीएम मोदी की पटना रैली से पहले सिलसिलेवार कई बम धमाके हुए थे। उस वक्त ही इन घटनाओं की जांच में ये खुलासा हुआ था कि राज्य में आतंकवाद की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। खासकर राज्य के सीमांचल और मिथिलांचल इलाके आतंकवादियों की पनाहगाह बन गए हैं।

हाल-फिलहाल खुफिया विभाग ने 36 आतंकियों की सूची एंटी टेररिस्ट सेल को सौंपी है जिसमें कहा गया है कि बिहार के तीन दर्जन आतंकी देश को दहला सकते हैं। इसको लेकर खुफिया विभाग ने अलर्ट भी जारी कर दिया है। विभाग ने एटीएस को जिन आतंकियों की सूची सौंपी है, उनकी पहचान देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार आतंकियों ने की है।

सबसे बड़ा सवाल है कि आतंकियों ने बिहार को ही सबसे सुरक्षित क्यों माना है? इसका जवाब ये है कि आतंकवादी बिहार को इसलिए भी चुनते हैं कि यहां उत्तरी बिहार नेपाल से सटा हुआ है। इसी वजह से आतंकियों का भारत में घुसना और बाहर निकलना आसान हो जाता है।

उत्तर बिहार है आतंकियों के छुपने की फेवरेट जगह 

उत्तर बिहार की बात करें तो ये आतंकवादियों के छुपने की फेवरेट जगह है और आतंकवाद से इसका गहरा कनेक्शन भी कहा जा सकता है। इसके कई जिले आतंकवादियों के पनाहगाह हैं जिसमें दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी का नाम सामने आता है। यहां से सटे कई जगहों पर नेपाल की खुली सीमा भी है। इस मार्ग से आतंकी बेरोकटोक आवाजाही कर सकते हैं।

वर्ष 2000 में पहली बार सीतामढ़ी से दो आतंकियों की हुई थी गिरफ्तारी

वर्ष 2000 में बिहार के सीतामढ़ी जिले में पहली बार दो आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी जिसमें आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्य मकबूल और जहीर की गिरफ्तारी की गई थी। इसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे। उसके बाद फिर 2006 से आतंकी बिहार में दोबारा सक्रिय हुए और धीरे-धीरे सीमांचल और मिथिलांचल से लगातार आतंकियों के तार जुड़ते रहे और कई गिरफ्तारियां हुईं।

साल 2006 में आतंकी हमले में मधुबनी जिले का नाम आया था सामने

2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट की घटना के बाद पहली बार मधुबनी जिले का नाम आतंकी घटना में आया। तब बासोपट्टी के मोहम्मद कमाल को एटीएस टीम ने गिरफ्तार किया था। इसी दौर में सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) पर प्रतिबंध लगाया गया।

आतंकवाद की नई नर्सरी के रूप में उभरा दरभंगा

मिथिला की धरती पर पनप रहा आतंकवाद गौरवशाली अतीत और वर्तमान को दागदार बनाने पर तुला है। यहां आइएम की दस्तक से हर कोई चिंतित है। एनआइए कई बार कह चुका है कि मिथिलांचल में आइएम चुपके-चुपके अपने संगठन का विस्तार कर रहा है। बता दें कि 2006 में आतंकवादी नए ठिकाने के तौर पर दरभंगा में पनाह लेते रहे हैं। यहां से असादुल्लाह रहमान उर्फ दिलकश, कफील अहमद, नकी अहमद जैसे सरगना पकड़े जा चुके हैं।

हैदराबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद तहसीन का नाम इंडियन मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य के तौर पर सामने आया था और वह समस्तीपुर का रहनेवाला है। उसे पढ़ने के लिए पिता ने दरभंगा भेजा था, जहां से वह गायब हो गया था। बाद में उसका नाम आतंकी घटनाओं में सामने आया और उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

दरभंगा को ही क्यों चुना था?

जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह सच सामने आया है कि आइएम का शातिर अहमद सिद्दी बप्पा उर्फ यासीन भटकल ने बेरोजगार युवाओं को गुमराह कर आतंकवाद का प्रशिक्षण देने केलिए दरभंगा जिले को ही चुना था। खुफिया सूत्रों की मानें तो आइएम के सदस्य अपना हित साधने के लिए मुस्लिमों की घनी आबादी वाले इलाकों को ही चुनते हैं।

13 आतंकियों में 12 दरभंगा के

देश में विभिन्न जगहों पर हुए बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार हुए आइएम से जुड़े 13 लोगों में 12 दरभंगा के ही हैं। वे असादुल्लाह रहमान उर्फ दिलकश, कफील अहमद, तलहा अब्दाली उर्फ इसरार, मोहम्मद तारिक अंजुमन, हारुण राशिद नाइक, नकी अहमद, वसी अहमद शेख, नदीम अख्तर, अशफाक शेख, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद इरशाद, गयूर अहमद जमाली और आफताब आलम उर्फ फारुक हैं। इनमें से एक मोहम्मद आदिल करांची (पाकिस्तान) का है।  बाकी 12 दरभंगा के हैं।

मोतिहारी से हुई थी भटकल और हड्डी की गिरफ्तारी

मोतिहारी की बात करें तो इसकी सीमा से इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल व अब्दुल असगर उर्फ हड्डी को गिरफ्तार किया गया था। अब तक अब्दुल करीम उर्फ टुंडा सहित कई कुख्यात हत्थे चढ़ चुके हैं। वहीं ब्लास्ट मामले में एनआइए द्वारा गवाह के तौर पर दरभंगा से हिरासत में लिए गए मेहरे आलम मुजफ्फरपुर के स्टेशन रोड स्थित होटल सिद्धार्थ के कमरा नंबर 110 से भाग निकला था।

27 अक्टूबर को पटना में सीरियल बम ब्लास्ट से मच गई थी सनसनी

27 अक्टूबर को पटना में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद से पूरे बिहार में सनसनी फैल गई थी। यह साजिश छोटी-मोटी नहीं थी। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। बोधगया की तर्ज पर पटना में आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था। खुफिया विभाग को ठेंगा दिखाते हुए दहशतगर्द अपने मकसद में कामयाब हो गए। इसके पश्चात तो पूरे सुरक्षा चक्र पर सवाल खड़ा हो गया था।

कैसे हैं सुरक्षा के इंतजाम 

उत्तर बिहार की सुरक्षा के इंतजाम के बारे में बात करें तो यहां थाने में जंग खाईं राइफलें, बूढ़े पुलिसकर्मियों के भरोसे संवेदनशील इलाके की सुरक्षा, इस बात के गवाह हैं कि ‘व्यवस्था’ कितनी चौकस है। समय-समय पर खुफिया विभाग चेतावनी दे रहा कि आतंकी हमला कर सकते हैं। लेकिन सुरक्षा की स्थिति यह है कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा दिख रही तथा कई महत्वपूर्ण जगहों पर लगे सीसीटी कैमरे खराब पड़े हैं।

कहा-मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने 

मुजफ्फरपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि आतंकी अलर्ट जैसी कोई खुफिया इनपुट जिला पुलिस प्रशासन को प्राप्त नहीं है। संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्कता हर वक्त बरती जाती है। भीड़ वाली जगहों पर सादी पोशाक में भी पुलिस तैनात रहती है।

उत्तर बिहार के कुछ युवा हैं भटकाव की राह पर 

शांति का पाठ पढ़ाने वाला उत्तर बिहार आज आतंक का पनाहगाह बन गया है और ये इलाका अब अशांत कहा जा रहा है। आतंकी हमले में यहां के कई लोगों की संलिप्तता सामने आने के बाद आम आदमी भी हैरान है और अब आतंकी हमले की आशंका का पता चलने के बाद सुरक्षाकर्मी भी सकते में हैं।

अब तक की गिरफ्तारियां

– 20 जुलाई, 2006 को मुंबई की एटीएस ने मधुबनी जिले के बासोपट्टी बाजार से मो. कमाल को मुंबई लोकल ट्रेन धमाके में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था।

– पहली जनवरी, 2008 को रामपुर (यूपी) सीआरपीएफ कैंप में हुए विस्फोट के तार मधुबनी से जुड़े। पुलिस ने लखनऊ से 2 जनवरी, 2008 को सबाऊद्दीन को गिरफ्तार किया था। वह मधुबनी जिले के सकरी थाने के गंधवारी गांव का है।

– 2009-10 में दिल्ली ब्लास्ट मामले में मधुबनी के बासोपट्टी के बलकटवा से मदनी की गिरफ्तारी हुई थी।

– 26 नवम्बर, 2011 को दिल्ली पुलिस ने मधुबनी के सिंघानिया चौक व सकरी के दरबार टोला से क्रमश: अफजल व गुएल अहमद जमाली को पकड़ा था।

– 19 नवम्बर, 2011 को दरभंगा के केवटी अंतर्गत बाढ़ समैला के कतील सिद्दीकी उर्फ साजन की दिल्ली में गिरफ्तारी हुई थी।

– दिल्ली विस्फोट के सिलसिले में 12 जनवरी, 2012 को बिहार के दरभंगा जिले के जाले थाना क्षेत्र स्थित देवड़ा बंधौली गांव निवासी नदीम और नक्की को गिरफ्तार किया गया था। दोनों की निशानदेही पर विस्फोट में प्रयुक्त मोटरसाइकिल मिली थी।

– 21 फरवरी 2012 को एटीएस की टीम ने शिवधारा से साइकिल मिस्त्री कफील अहमद को पकड़ा था। उसे आइएम का मेंटर बताया गया।

– जिले के केवटी थाने के समैला गांव से गत छह मई की अलस्सुबह कर्नाटक पुलिस ने संदिग्ध आतंकी मो. कफील अख्तर को गिरफ्तार किया था। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम विस्फोट में उसकी संलिप्तता सामने आई थी।

– 13 मई को सऊदी अरब में केवटी के बाढ़ समैला गांव के फसीह महमूद को भारतीय सुरक्षा एजेंसी ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से पकड़ा था। आइएम चीफ रियाज भटकल और इकबाल भटकल से जुड़ा फसीह 2008 में बटला हाउस मुठभेड़ के बाद सऊदी अरब भाग गया था। जहां से आइएम को धन देता रहा।

– दाऊद का सहयोगी फजलुर्रहमान भी जाले थाने के देवड़ा बंधौली गांव का है। अभी वह तिहाड़ जेल में बंद है।

– 21 जनवरी 2013 को लहेरियासराय थाने के चकजोहरा मोहल्ला से मो. दानिश अंसारी को कथित आतंकी हमले की साजिश में गिरफ्तार किया गया था। एनआइए सूत्रों के मुताबिक दोनों आइएम सरगना यासीन भटकल के गुर्गे थे।

दिग्भ्रमित हो रहे युवा, रोक लगाना जरूरी

पूर्व प्राचार्य व समाजशास्त्री प्रो. विनय कुमार वर्मा का मानना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आइएम पांव पसार रहा है। आइएसआइ देश को अस्थिर करने में जुटा है। उससे जुड़ा संगठन आइएम एक समाज के युवाओं को दिग्भ्रमित कर गलत रास्ते पर ले जा रहा है। इस पर सख्ती से रोक लगे।

मौलाना इमाम जियाउर्र रहमान कहते हैं कि युवाओं को आतंकी संगठन बरगला कर गलत रास्ते पर डाल रहे हैैं, जो न तो देश हित में है और न ही कौम के। इससे कौम की बदनामी होती है। युवा व किशोर वर्ग को अपनी ताकत खुद की तरक्की व देश के विकास में लगानी चाहिए।

दरभंगा स्थित मिल्लत कॉलेज के प्रिंसिपल व जाने-माने समाजशास्त्री डॉ. मुश्ताक अहमद ने कहा कि सामाजिक सरोकारों से विमुख होने के कारण युवा मन भटक रहा है। आज की शिक्षा का एकमात्र ध्येय केवल रोजगारपरक होकर रह गया है। ऐसी शिक्षा भौतिकवाद की ओर उन्मुख करती है। रहमखां मस्जिद के इमाम मौलाना अफाक अहमद का कहना है कि उच्च जीवनशैली और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में युवा भटक रहे हैं।

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