मिल प्रबन्धको द्वारा 17 पूर्ब की गई 326 स्थाई कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी ।।

क्राइम फ़्लैश का मुरादाबाद श्रम बिभाग के उपश्रमायुक्त के भ्र्ष्टाचार का खुलासा ।।
मुरादाबाद

योगी राज में उत्तर प्रदेश (मुरादाबाद)श्रम विभाग का खुलेआम भ्र्ष्टाचार ।

1975 कम्पनी के स्थापना के समय इस फैक्ट्री का नाम यू0पी0स्ट्रा0एन्ड0एग्रो प्रा0लि0अगवानपुर मुरादाबाद था ।
परन्तु श्रम विभाग के मिलीभगत से और रिश्व्त के जोर पर 326 कर्मचारियों के पेट पर लात मार दी गयी।झा पैसा वह इंसाफ कहा बेचारे मजदूर 17 वर्षो से रोटियों को मोहताज बने हुए है ।और न्याय के लिए दर दर की ठोकरे खा रहे हैं ।परंतु श्रम विभाग और अन्य लोकतंत्र के स्तम्भो द्वारा इन्हें न्याय नही मिल पा रहा कुछ तथ्य इस प्रकार है ।
1995 में इस फैक्ट्री का नाम बदल कर डी0एस0एम0एग्रो0लि0अगवानपुर वदल दिया गया ।
1-.20/7/2001 को फैक्ट्री प्रबन्धको ने श्रम बिभाग की मिलीभगत से 282 कर्मचारियों की फर्जी सूची बनाकर अबेधानिक स्थाई बन्दी कर दी ।
2.अबेधानिक स्थाई बन्दी के दिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
श्रम मंत्रालय, भारत सरकार के उप क्षेत्रीय कार्यालय बरेली से प्राप्त सूची में 326 कर्मचारी थे ।
जिसमे उत्तर प्रदेश ओधोगिक बिबाद 1947 के प्रबधनो का स्पस्ट उल्लंखन किया गया ।

3.यू0पी0इन्डस्ट्रीयल डिस्ट्रीब्यूटर की धारा 6w के अनुसार यदि की फैक्ट्री में कर्मचारियों की संख्या 300 या उससे अधिक है । तो स्थाई बन्दी से पहले सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य है ।
फैक्ट्री के डायरेक्टर ओम नारायण द्वारा स्थाई बन्दी का नोटिस दिनक 20/7/2007 में स्पष्ट लिखा था कि सरकार से अनुमति नही ली गयी ।
फैक्ट्री प्रबन्धक प्रशासन एस0पी0सिन्हा ने 282 कर्मचारियों की फर्जी सूची बनाकर श्रम परिवर्तन अधिकारी अखलाख अहमद से निरीक्षण करके उपश्रमायुक्त मैडम रीता भदौरिया से साठ गांठ करके फर्जी सूची का सत्यापन करा लिया था ।
4-स्थाई बन्दी की तारीख से आज तक एस0पी0सिन्हा द्वारा 6 सूची कर्मचारियों की उपश्रमायुक्त द्वारा कर्मचारियों को RTI द्वारा दिलवाई और हर सूची में कर्मचारियों की संख्या में अन्तर रहा ।
5-प्रबन्धक प्रशासन एस0पी0सिन्हा ने दिनांक 15/10/2001को एक पत्र अपने हस्ताक्षर करके उपश्रमायुक्त मुरादाबाद के यहाँ प्रेषित किया जिसमें लिखा स्थाई बन्दी घोषित करने के उपरांत फैक्ट्री में कार्यरत सभी श्रमिको व कर्मचारियो का भुगतान मय बन्दी मुआवजा के साथ पुराण रूप से अदा कर दिया गया ।
जबकि किसी भी कर्मचारी को कोई भी भुगतान नही दिया गया था ।ये प्रबन्धको की श्रम विभाग की मिलीभगत से सिर्फ कागजो में ही दर्शाया गया था ।
6-स्थाई बन्दी के शिकार कर्मचारियो ने कर्मचारी भविष्य निधि ,श्रम मंत्रालय भारत सरकार के उप क्षेत्रीय से प्राप्त प्रमाण पत्र के साथ एक प्रार्थना पत्र दिनांक 13/11/2009 उपश्रमायुक्त मुरादाबाद व 16/11/2009 को श्रमायुक्त कानपुर को डाक द्वारा देकर 326 स्थाई कर्मचारियो की ड्यूटी बहाली व स्थाई बन्दी को अबेधानिक घोषित करने की मांग की थी ।
लेकिन दोनो उपश्रमायुक्तो ने कोई कार्यवाही नही की ।
स्थाई बन्दी से ग्रस्त 326 कर्मचारियो मे से लगभग 60 की बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या या दम तोड़ चुके हैं ।और ये संख्या बढ़ने पर है ।
7-दिनांक 4/04/12 को कर्मचारियो ने एक प्रार्थना पत्र महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश सरकार को कर्मचारियों के साथ हुई फैक्ट्री प्रबन्धको के साथ श्रम विभाग कि मिलिभगत की शिकायत की ।
राज्यपाल उ0प्र0 सरकार ने कार्यवाही के लिये श्रमायुक्त कानपुर को अग्रषित कर दिया गया ।
दिनाक 11/9/12 को इन कर्मचारियों के लिये लड़ने वाले सुधीर सक्सेना से उपश्रमायुक्त कानपुर प्रदीप श्री वास्तब ने शपथ पत्र व सबूत प्रस्तुत करने का पत्र भेजा गया ।
जिसके जवाब में सुधीर सक्सेना ने दिनांक 21/09/12 को शपथ पत्र के साथ सबूत पंजिकृत डाक द्वारा दिये गये ।
दिनांक 20/11/12 को श्रमायुक्त कानपुर ने अपने पत्र में वर्णित बिन्दुओ पर अग्रसर कार्यवाही प्रक्रिया प्रकरण में मा0 ओधोगिक नयायाधिकरण मेरठ द्वारा अभिनिरण्य पारित होने के उपरांत बिचारणय तदनुसार शिकायती प्रकरण का निष्ठरण कर दिया गया है1
8-स्थाई बन्दी से प्रभावित कर्मचारियो के अनुसार कर्मचारियो के नेता मदन लाल शर्मा ने ओधोगिक न्यायधिकरण मेरठ में सी0बी03/8 अभिनिरण्य बिबाद 2/2010 मे अबिधिक तालाबंदी का शपथ पत्र देकर श्रम विभाग के अधिकारियों एब फैक्ट्री प्रबन्धको का बचाव किया था ।
9-स्थाई बन्दी से प्रभावित कर्मचारियो ने थक कर एक प्रार्थना पत्र दिनांक 25/9/2013 को राष्ट्रपति को दिया ।
8/10/13 को राष्ट्रपति कार्यालय से उक्त पत्र पर कार्यवाही करने के लिये मुख्य सचिब उ0प्र0 सरकार को भेजा गया ,
कार्यलय मुख्यमंत्री लोक शिकायत अनुभाग 2 के अबध नारायण अनु सचिव जन सूचना अधिकारी ने आयुक्त ओधोगिक बिकास के पास भेज कर लीपापोती कर दी ।
10-इसके बाद फैक्ट्री प्रबन्धको द्वारा अबेधनिक स्थाई बन्दी से प्रभावित कर्मचारियो ने प्रधान मंत्री को एक पत्र भेजा ।
उस पत्र पर प्रधान मंत्री कार्यालय से दिनांक9/1/17को आदेश हो गई जिसको मुख्य सचिव कार्यलय के जवाहर लाल दवाकर बैठ गई और कोई कार्यवाही नही करी।
जिसकी सूचना 30/03/17 को मुख्य मंत्री को उनके फैक्स द्वारा कर्मचारियों द्वारा दी गयी ।
दिनांक 20/04/17को मुख्यमंत्री को एक प्रार्थना पत्र मय प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेशों के साथ पंजिकृत डाक द्वारा प्रेषित किया ।
4 बार मुख्यमंत्री द्वारा जनता दरवार में उक्त बिबाद के निष्ठरण के आदेश हुये लेकिन उपश्रमायुक्त एम0एल0चौधरी ने फर्जी सूची का व्योरा लिख कर निष्ठरण कर दिया ।
इस 17 वर्ष के लंबे समय मे 326 कर्मचारियो के साथ फैक्ट्री प्रबन्धको के द्वारा धोखाधड़ी व इनकी कानूनी कार्य वाही में श्रम विभाग के भृष्ट अधिकारियो की मिलीभगत के साथ साथ फैक्ट्री का नाम डी0एस0एम0एग्रो0 से बदल कर कैलाश पेपर मिल हो गया था ।वर्तमान में इसका नाम जीनस पेपर मिल के नाम से फैक्ट्री उत्पादन कर रही है । और प्रबन्धक वही है ।लेकिन इतने लंबे समय व इनती कानूनी कार्यवाही के बाद भी इन कर्मचारियों की सुध लेने कोई तैयार क्यो नही ।
नोट-कर्मचारियों व प्रबन्धको की 17 वर्ष लम्बी लड़ाई में एक बात तो स्पष्ट हो जाती है । फैक्ट्री प्रबन्धको ने अपनी मर्जीनुसार ही अवैधानिक स्थाई बन्दी 326 कर्मचारियो के करोड़ो रूपये मारने की नीयत से की थी ।जिसमे श्रम विभाग के अधिकारियों ने इनका साथ देकर अपने ऊपर सबाल खड़े कर लिये।तभी तो श्रम विभाग ने भारत सरकार के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सूची को झुठला कर फर्जी सूचियों के आधार पर कोई कार्यवाही नही कर रहे ।जाहिर है इनको फैक्ट्री प्रबन्धको द्वारा मोटा पैसा दिया जा रहा है1
आखिर गरीब मजदूर न्याय के लिये जाये कहा शासन का आदेश भी उन्ही रिश्वतखोरों के पास ही जाता है ।और वे मामले को लीपा पोती कर के रफ़ा दफा कर देते है ।
मिल प्रबन्धको द्वारा अवैधेनिक स्थाई बन्दी से प्रभावित कर्मचारियों के हक की लड़ाई के लिये फिर एक बार कर्मचारियों के साथ मिलकर एक पत्र 7/6/18 को उप श्रमायुक्त मुरादाबाद के यहाँ प्रेषित किया था ।
जिसमे
सहायक श्रमायुक्त योगेश चन्द्र ने 19/6/18 को फैक्ट्री प्रबन्धको एक नोटिस जारी किया जिसमें लिखा था ।27/6/18 को सम्बन्धित प्रकरण सभी सुसंगत अभिलेख सहित उपस्थित होकर वार्ता में प्रतिभाग करने का नोटिस जारी किया ।लेकिन सेवायोजक पक्ष तारीख पर अनुउपस्थित रहा और श्रमिक पक्ष उपस्थित रहा तब अगली तारीख 4/7/18; 12/7/18; 17/7/18 डाली गई ।और 25/7/18 को दूसरा नोटिस जारी किया गया जिसमें भी 1/8/18; 7/8/18तारीखे पड़ी और अन्त में एक लास्ट नोटिस 16/8/18 को जारी किया गया जिसमे 27/8/18 को सेवायोजक पक्ष को उपस्थित होना था ।इन नोटिसों पर भी सेवायोजकों की तरफ से कोई नही पहुचा और आगे तारीखे इस प्रकार पड़ी 5/9/18;12/9/18;व19/9/18 को को यह कहते हुए मामले का निस्तारित कर दिया गया कि सेवायोजक पक्ष की लगातार अनुउपस्थिति के कारण दोनों पक्षों में वार्ता करना संभव नही हो सका है ।व श्रमिक पक्ष को परामर्श दिया कि यदि वे चाहे तो सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना वाद दायर कर सकते है।और प्रकरण को निस्तारित कर दिया । और अपना पल्ला झाड़ लिया ।
इस पूरे प्रकरण से सम्बंधित जानकारी क्राइम फ़्लैश ने मिल प्रबन्ध एस0 पी0 सिन्हा से जाना तो उन्होंने बताया कि 27/8/18 को ही विभागिय कार्यलय में जाकर समस्त अभिलेखो के साथ एक पत्र भी जमा करा दिये थे ।
व मिल में स्थाईबन्दी के समय कर्मचारियों की संख्या 282 ही बताई लेकिन R T I के माद्यम से दी गयी 6 सूचियों व सभी मे कर्मचारियों की संख्या में अंतर के बारे में कहा कि हमने तो केवल एक ही सूची दी थी बाकी का हमे नही पता । कि वे सूचिया कहाँ से दी गयी ।इसकी उनको कोई जानकारी नही व कर्मचारियों से सम्बंधित मामला मेरठ टर्मिनल कोट में चल रहा है ।इसमें श्रम बिभाग के दखल देने का कोई औचित्य ही नही बनता । और श्रम बिभाग में सम्बंधित सारे दस्तावेज जमा करें कागजो की रिसिबिग की कॉपी दिखाई ।

बड़ा सवाल

श्रम बिभाग मुरादाबाद के उपश्रमायुक्त के कार्यालय में जब मिल प्रबन्धको द्वारा 27/8/18 को कार्यालय में प्रकरण से सम्बंधित सारे अभिलेख मय पत्र के जमा कर दिये थे तो । और सेवायोजक पक्ष की उपस्थिति व जमा करे दस्तावेजो को श्रमिकों से क्यो छिपाया गया ।और अंत मे नाटकीय ठंग से पूरे मामले का निस्तारण मिल प्रबन्धक के द्वारा दिये गये पत्र अनुसार ही कर दिया गया ।
326 कर्मचारियों की स्थाई बन्दी से सम्बंधित पूरे प्रकरण में श्रम बिभाग मुरादाबाद की स्थिति संदिग्ध नजर आने लगी है ।
इससे साफ प्रतीत हो रहा है कि श्रम विभाग मुरादाबाद उपश्रमायुक्त मैडम बन्दना और सहायक श्रमायुक्त योगेश चन्द्र ने 27/8/18 को एस0पी0सिन्हा के द्वारा दिये गए पत्र के अनुसार ही पूरे कर्मचारियों के प्रकरण का निस्तारित कर अपनी तिजोरियों को भर लिया ।और इन 326 कर्मचारियों को फिर मझधार में छोड़ दिया ।अब ये कहाँ जाये जिससे इनको इंसाफ मिले ।अभी इनको कितने और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे ।

अहम मुद्दा

श्रम विभाग मुरादाबाद के अधिकारियों ने मिल प्रबन्धको से मिलीभगत करके 326 कर्मचारियों के 17 वर्ष के प्रकरण में लीपा पोती कर दी तो किस तरह एक आम आदमी के साथ न्याय की उम्मीद की जा सकती है ।
ज़िले पर बेठे आलाधिकारी उपश्रमायुक्त कार्यालय में बैठे भृष्ट अधिकारियों पर किस तरह की कार्यवाही करके इन 326कर्मचारियो को क्या इंसाफ दिलाएंगे ।
व योगी जी के उत्तर प्रदेश को भृष्टार से मुक्त सपने को किस तरह पूरा करेंगे इसका जवाब तो भविष्य ही दे पायेगा ।

Loading...