Published On: Tue, May 29th, 2018

मानसून के मुहाने पर डे जीरो की दस्तक, भयंकर जल संकट से घिरे 22 प्रमुख शहर

पश्चिमी हवाएं यानी मानसून भारत पहुंच गई हैं। केरल में पिछले 24 घंटे के दौरान बीस मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है। राज्य के 22 चिन्हित स्थानों पर अगर औसतन 3 मिलीमीटर बारिश दक्षिणी-पश्चिमी हवाएं बरसा दें तो इसे मानसून का आधिकारिक आगमन कहा जाता है। इस लिहाज से मानसून का आगाज इस बार पूरे एक हफ्ते एडवांस में हुआ है। अब किसान को मानसून के उसके खेत में पहुंचने का इंतजार है, लेकिन बिडंबना ही कहिए कि मानसून की इस आमद के बीच देश के अधिकांश इलाके भयंकर जल संकट से जूझ रहे हैं रहे हैं।
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आलम यह है कि 22  बड़े शहर ‘डे जीरो ‘ की और बढ़ रहे हैं। इनमे से सात शहर उसी कोस्टलाइन पर मौजूद हैं जहां से होकर मानसून सबसे पहले चेरापूंजी की पहाडिय़ों में रिकार्ड तोड़ वृष्टि करती है। यह निश्चित तौर पर चिंतनीय है। समुद्र किनारे बसे कोच्चि से लेकर पहाड़ पर बसे शिमला तक सब जगह पानी को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है। जल संकट की वजह से आईपीएल में चेन्नई को अपना होम ग्राउंड बदलना पड़ गया।  उधर शिमला के वाशिंदे सैलानियों से शिमला न आने की अपील कर रहे हैं ताकि उन्हें कम से कम उन्हें पीने को तो पानी मिल सके। शिमला में  पानी की राशनिंग यूं तो बरसों से हो रही है लेकिन इस बार पानी की समस्या इतनी विकराल हो गयी है कि हफ्ते में एक बार पानी आता है और वह , भी कुछ समय के लिए। देश की राजधानी दिल्ली, आर्थिक राजधानी मुंबई और आईटी राजधानी बेंगलुरु में भी यही हाल हैं ये शहर भी तेज़ी से ‘डे जीरो ‘ की और बढ़ रहे हैं। जाहिर है अगर कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए तो जल संकट का पानी सिर के ऊपर से गुजर जाएगा लेकिन लोगों के हलक फिर  भी सूखे रहेंगे।
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क्या है डे जीरो?
डे जीरो की अवधारणा एक दशक पहले अस्तित्व में आई थी। इसकी परिकल्पना उस दिन को लेकर है जब किसी शहर में नलों में पानी आना बंद हो जाएगा। आज दुनिया के 200  शहर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।  इनमे बीजिंग, साओ पोलो , इंस्ताबुल, काबुल , मेक्सिको , केप टाउन , नैरोबी सना (यमन)कराची और ब्यूनस आयरस जैसे शहर  शामिल हैं।

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