Published On: Sat, May 26th, 2018

मोदी सरकार के चार साल ‘बेमिसाल’, अब करेंगे आगे की बात

केंद्र में मोदी सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। इन चार वर्षों के दौरान विभिन्‍न मोर्चों पर सरकार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हर परेशानी को दूर कर सरकार ने जीत हासिल की। फिर चाहे वह डोकलाम का मुद्दा रहा हो या फिर सीमा पर पाक की कार्रवाई का या फिर देश में नक्‍सलवाद का या फिर घरेलू मंच पर तेल का। हर मुद्दे पर सरकार ने अपने आपको बखूबी से पेश किया और न सिर्फ देश बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत का मान बढ़ाया है। हर मोर्चे पर पारदर्शी रहते हुए सरकार ने अपने सभी फैसलों की जानकारी आम-जन तक पहुंचाई। इतना ही नहीं खुद पीएम मोदी ने सोशल नेटवर्किंग से जुड़कर लोगों को अपने रोजाना के कार्यक्रम और लोगों को अपनी सोच के बारे में बताया और उनसे सुझाव भी मांगे। पीएम मोदी देश के ऐसे पहले राष्‍ट्राध्‍यक्ष हैं जिन्‍होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम को शुरू कर नियमित तौर पर अपने विचार रेडियो के माध्‍यम से भारत की जनता के सामने रखे।

भ्रष्‍टाचार पर चोट

चार वर्ष पहले भ्रष्‍टाचार पर करारी चोट, राष्‍ट्रहित सवोपर्य, देश की आतंरिक और बाहरी सुरक्षा सबसे पहले के मुद्दे पर सरकार केंद्र में आई थी। इन सभी क्षेत्रों में भाजपा ने बखूबी काम किया। नोटबंदी पर विपक्ष ने सरकार को जमकर लताड़ा, लेकिन केंद्र की सरकार अपने मजबूत हौसलों की बदौलत परेशानियों से डिगी नहीं और नोटबंदी को सफल साबित करके दिखाया। इसका नोटबंदी का सीधा असर आतंकवाद से प्रभावित राज्‍य जम्‍मू कश्‍मीर में दिखाई दिया जहां पर पैसे लेकर सेना पर पत्‍थर फेंकने वालों का कारोबार रातों-रात ठंडा पड़ गया। नोटबंदी का एक दूसरा बड़ा फायदा ये हुआ कि पाकिस्‍तान से आई नकली नोटों की खेप रातों-रात कागज के टुकड़ों में बदल गई। इसका एक दूसरा फायदा आतंकवाद की रोकथाम पर भी दिखाई दिया।

बेनामी संपत्ति कानून और ई-गर्वनेंस

विपक्ष ने भले ही नोटबंदी को लेकर सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई लेकिन दूसरी तरफ पहली बार ऐसा दिखाई दिया कि देश की जनता सरकार के खड़ी दिखाई दी। सरकार के इस फैसले ने भ्रष्‍टाचार पर भी जबरदस्‍त प्रहार किया। इसके अलावा पहली ही बैठक में कालेधन के खिलाफ एसआइटी के गठन का फैसला करने वाला मोदी मंत्रिमंडल भ्रष्टाचार के आरोपों से बेदाग रहा है। बेनामी संपत्ति कानून लागू कर सरकार ने भ्रष्‍टाचार पर रोक लगाने की अपनी मंशा पूरी तरह से साफ कर दी। ई-गर्वनेंस का जो उदाहरण केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में पेश किया है वह इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला।

आतंकवाद पर करारा वार

आतंकवाद के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार ने सीमा पर सर्जिकल स्‍ट्राइक कर यह साफ कर दिया कि वह देश की सुरक्षा के लिए अपने सैनिकों को सीमा पार भेजने से भी नहीं हिचकिचाएगी। सितंबर 2016 में पाकिस्‍तान की सीमा के अंदर की गई कार्रवाई से वहां मौजूद आतंकी और उनकी रक्षा में लगे पाक सैनिक भौचक्‍के रह गए थे। हालांकि आतंकवाद को बर्दाश्‍त न करने को लेकर यह इस सरकार की पहली कार्रवाई नहीं थी। इससे पहले म्‍यांमार में भी भारतीय सेना के जवानों ने इस तरह की कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इन दोनों कार्रवाई के दौरान जवान सुरक्षित अपनी सीमा में दाखिल भी हो गए थे।

आतंक से जंग जारी

आतंकवाद को रोकने और आतंकियों की धरपकड़ को लेकर केंद्र सरकार ने जो मुहिम चार वर्ष पहले शुरू की थी वह अब भी जारी है। इसी मुहिम के तहत इस सरकार के नेतृत्‍व में सेना ने जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकियों को ढेर कर बड़ी सफलता भी हासिल की है। आतंकियों के पोस्‍टर ब्‍वॉय से लेकर कई आतंकियों को सेना अब तक ढेर कर चुकी है। सेना का खौफ अब न सिर्फ आतंकियों में बल्कि पाकिस्‍तान में भी साफतौर पर देखा जा रहा है।

विदेश नीति की धूम

केंद्र की मोदी सरकार ने भारत को विश्‍व मंच पर जो स्‍थान दिलाया है वह इससे पहले उसे कभी नहीं मिला था। बात चाहे एनएसजी ग्रुप से जुड़ने की मुहिम की हो या यूएन में स्‍थायी सदस्‍यता की भारत ने इसके लिए पुरजोर कोशिश की है और कर रहा है। आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले पाकिस्‍तान को लेकर केंद्र ने जो नीति बनाई उसकी ही बदौलत वह वैश्विक मंच पर खुद ब खुद अलग-थलग पड़ गया। भारत ने जो कहा उसको ही अब पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी दोहरा रहे हैं। वह खुलेआम कह रहे हैं कि पाकिस्‍तान में आतंकियों को पनाह दी गई और उनके खिलाफ जो कार्रवाई होनी चाहिए थी वह नहीं हो सकी।

पाकिस्‍तान को बेनकाब करने में सफल

वैश्विक मंच पर भारत ने पाकिस्‍तान को बेनकाब करने की सफल मुहिम चलाई जिसके परिणामस्‍वरूप सार्क देशों ने भी पाकिस्‍तान से किनारा कर लिया था। वहीं दूसरी ओर डोकलाम के मुद्दे पर आंख दिखा रहे चीन को भी भारत ने कूटनीतिक तौर पर जबरदस्‍त पटखनी देने में सफलता हासिल की थी। इसके बाद भी डोकलाम के मुद्दे पर ड्रेगन शांत हो सका था। भारत ने अरुणाचल प्रदेश को विवादित बताने वाले चीन को यह भी खुलेतौर पर जता दिया कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करना बखूबी जानता है। ब्रिक्‍स से लेकर एससीओ तक में केंद्र सरकार ने अपनी बातों बखूबी रखा जिसको पूरी विश्‍व बिरादरी ने माना।

स्वच्छता को लेकर जगाई अलख

मोदी सरकार ने साफ-सफाई को लेकर लोगों को जो जागरुक करने की मुहिम शुरू की उसका ही परिणाम है कि आज ज्‍यादातर गलियां और सड़कें साफ दिखाई देती है। इससे पहले इस बारे में किसी ने नहीं सोचा था। इसके लिए पीएम मोदी ने जनता से सीधा संवाद किया और उन्‍हें इसके लिए प्रेरित भी किया। शहरों से लेकर गांवों तक में शौचालयों का निर्माण करवा कर पीएम मोदी ने देश को लोगों को साफ सुथरा रहने और अपनी जगह को साफ सुथरा बनाने की ली। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने अब तक लाखों शौचालयों का निर्माण करवाकर देश की जनता से स्‍वच्‍छता की गारंटी ली है। वहीं दूसरी तरफ लोगों ने भी उन पर विश्‍वास जताया है। यह विश्‍वास तभी आ सका है जब पीएम मोदी खुद आम जनता से जुड़े और उनसे संवाद किया।

पीएम मोदी को मिला जनमानस का साथ

हालांकि विपक्ष ने यहां पर भी पीएम मोदी पर सवाल उठाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वहीं दूसरी ओर आम जन से जुड़े इस मुद्दे पर पीएम मोदी की लोगों ने भरपूर सराहना की। सरकार के शिखर के स्तर पर स्वच्छता को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करने की इस गंभीर पहल का ही नतीजा है कि देश में शौचालय का निर्माण एक मिशन बन गया। चार साल में शौचालय का दायरा 39 फीसद से छलांग मारकर 85 फीसद पहुंच गया है। स्वच्छता का सवाल केवल गांव-शहर में शौचालय बनाने तक नहीं रहा बल्कि अपने आस-पास से लेकर देश को गंदगी से मुक्त करने की बन रही सोच तक पहुंच गया है।

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