Published On: Thu, May 24th, 2018

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से फिलहाल नहीं मिलेगी राहत, वक्त आने पर सरकार लेगी फैसला

 

आसमान छू रही पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बीच खबर है कि सरकार वक्त आने पर इसका फैसला लेगी। सरकार की तरफ से कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साफ किया है कि अभी इनकी कीमत घटाने में वक्त लगेगा। कैबिनेट की बैठक में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने को लेकर के किसी तरह की कोई बात नहीं हुई। मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 30 पैसे बढ़ने के साथ 76.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल 26 पैसे बढ़कर 68.08 रुपये प्रति लीटर हो गया। यह पेट्रोल-डीजल की सबसे बढ़ी हुई कीमत है।

कीमतें घटाने को इस सप्ताह एकसाथ कई कदम उठाएगा केंद्र
नौ दिनों में पेट्रोल 2.24 रुपये, जबकि डीजल 2.15 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ईंधन की बढ़ती कीमतों को संकट की स्थिति मान रही है। उन्होंने बताया कि सिर्फ उत्पाद शुल्क घटाने पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। सरकार कीमतों को कम करने के लिए इस सप्ताह एकसाथ कई कदम उठाएगी। वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय इस पर मंथन कर रहे हैं।

राज्य भी कीमत घटाने को उठाएं कदम
मूल्य संवर्द्धित कर (वैट) के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर राज्य में अलग हैं। इनकी खुदरा कीमतों पर 20-35 फीसदी वैट जुड़ रहा है। केंद्र के साथ राज्य भी कीमत करने के लिए कदम उठाएं। दिल्ली में अप्रैल में पेट्रोल पर 15.84 रुपये, जबकि डीजल पर 9.68 रुपये प्रति लीटर वैट था, जिसे मंगलवार को बढ़ाकर पेट्रोल पर 16.34 रुपये और डीजल पर 10.02 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया।

राजस्व नुकसान का सता रहा डर
अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को एक डॉलर का मूल्य 67.97 रुपये रहा। यह 16 महीने के निचले स्तर पर है। इससे भी कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। केंद्र पेट्रोल पर 19.48 रुपये, जबकि डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क वसूलता है। पेट्रोल और डीजल पर एक रुपया उत्पाद शुल्क घटाने पर 13 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।

सिर्फ उत्पाद शुल्क में कटौती करने पर नहीं रहा जाएगा निर्भर
सरकार ने नवंबर, 2014 और जनवरी, 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया है, जबकि एक बार 2 रुपये प्रति लीटर कमी की गई। नौ बार में पेट्रोल पर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से सरकार को 2.42 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस दौरान सरकार ने सभी राज्यों से वैट कम करने को कहा, लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने ही कमी की।

कैसे घटेंगी कीमतें
केंद्र व राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अंकुश के लिए एक साथ कई कदम उठाने होंगे। केंद्र को जहां उत्पाद शुल्क में कटौती करनी होगी, वहीं राज्यों को वैट घटाना होगा। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने का लाभ सिर्फ उन्हीं राज्यों को मिलेगा, जहां वैट की दर काफी ज्यादा है। जिन राज्यों में वैट 20 फीसदी के आसपास है, वहां जीएसटी की उच्चतम दर 28 फीसदी लागू करने से नुकसान होगा।

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