छत्तीसगढ़ : संविधान की शपथ लेकर रचाई शादी, लगे इंकलाब के नारे

रायपुर  : दुनियाभर में शादी-ब्याह के अनेकों विधान हैं लेकिन भारत के एक शख्स ने भारतीय संविधान को साक्षी मानकर अपना विवह संपन्न कराया। दरअसल, हर धर्म-संप्रदाय में अलग-अलग तरह से शादियां होती है लेकिन एक बात सब जगह समान है। सभी प्रकार की सभ्यताओं में साक्षी का होना जरूरी होता है।

हिन्दुओं में अग्रि को साक्षी माना जाता है तो सिखों में श्रीगुरुग्रंथ साहिब को साक्षी मानकर विवाह किया जाता है। मुसलमानों में निकाह पढ़ाने वाले मौलवी धार्मिक प्रतिनिधि के तौर पर साक्षी होते हैं तो ईसाई चर्च में गॉड के प्रतिनिधि जीसस को साक्षी मानकर विवाह संपन्न करते हैं। शादी में इंकलाव के भी नारे लगे।

इन तमाम परंपराओं और चिंतन को दरकिनार करते हुए छत्तीसगढ के एक शख्स ने भारतीय संविधान को साक्षी मानकर पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया। मसलन संविधान की शपथ लेकर दूल्हा-दुल्हन परिणय-सूत्र में बंधे। यही नहीं इस विवाह की खासियत यह रही कि बारात रिक्शे से निकली। बीते 23 दिसंबर यानी रविवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर से करीब 150 किलोमीटर दूर रतनपुर के पास लखनीपुर में एक अनोखी शादी हुई। इस शादी की तैयारी, शादी की रस्में, बारात और शादी का जश्न सबकुछ दूसरी शादियों से एकदम अलग था। पेशे से वकील प्रिया ने थियेटर कलाकार अनुज संग शादी संविधान की शपथ लेकर रचाई।

इस शादी में ज्यादातर मजदूर, गरीब और जन आंदोलन से जुड़े लोग ही बाराती के तौर पर शामिल थे और खास बात यह कि बारात रिक्शे पर बड़ी ही धूमधाम से निकाली गई थी। रात के वक्त जब शादी की यह अनूठी रस्में शुरू हुईं तो सबकी आंखें खुली की खुली ही रह गईं। प्रियंका और अनुज ने संविधान की शपथ खाकर एक-दूसरे को अपनाया। शपथ के दौरान दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ कुछ इस तरह संविधान की किताब में लिखी बातों को दोहराया।

मैं अनुज-प्रियंका भारत के संविधान की शपथ लेते हैं कि हम एक दूसरे को हमेशा एक दूसरे की तरह रहने देंगे। हम दोनों कभी भी मतभेद को मनभेद में नहीं बदलेंगे। हम दोनों आजीवन घर के सारे काम आपस में बराबर से बांट लेंगे। कितना भी गुस्सा आए हम दोनों हिंसा से दूर रहेंगे। घर के अंदर या बाहर जातिवाद, अभद्र, महिला विरोधी, वगज़् विरोधी सांप्रदायिक भााषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

दुनिया के सारे बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानेंगे। सारे वंचित समाज को अपना परिवार मानेंगे। अपना आदर्श स्थापित कर समाज बदलेंगे। हम भारत के संविधान द्वारा स्थापित मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति ना सिर्फ  निष्ठा रखेंगे बल्कि उनको कायम रखने के लिए जीवन समर्पित कर देंगे।

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