Published On: Sat, Apr 7th, 2018

कोर्ट में दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं, इसीलिए अधिकार खत्म किए जा रहे: भाजपा सांसद की मोदी को चिट्टी

लखनऊ.यूपी में भाजपा के दलित सासंदों की पार्टी से नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब नगीना लोकसभा सीट से सांसद डॉ. यशवंत सिंह का नरेंद्र मोदी को लिखा लेटर सामने आया। 2 अप्रैल को सांसद ने चिट्ठी में कहा कि कोर्ट में हमारे समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं है, इसी वजह से अदालतें हमारे खिलाफ नए-नए फैसले देकर दलितों के अधिकारों को खत्म कर रही हैं। पिछले दिनों रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से दलित सांसद छोटेलाल खरवार और इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे भी मोदी को चिट्ठी लिख चुके हैं। उन्होंने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव और दलितों पर अत्याचार के मुद्दे उठाए हैं।

1. यशवंत सिंह, सांसद

– नगीना से सांसद ने प्रधानमंत्री से दलितों के लिए आरक्षण बिल पास कराने की मांग की। लेटर में लिखा, ”जब सांसद चुनकर आया था तब मैंने आपसे मिलकर प्रमोशन में आरक्षण के लिए बिल पास कराने का अनुरोध किया। संगठन के लोग भी यही चाहते हैं, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इस देश में करीब 30 करोड़ दलितों के लिए कोई बिल पेश नहीं हुआ।”

– ”कोर्ट में हमारे समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं है, इसी वजह से कोर्ट हर समय हमारे खिलाफ नए-नए फैसले देकर दलितों के अधिकारों को खत्म कर रहा है। मौजूदा हालात में बीजेपी के दलित सांसद तक अपने समाज की रोज-रोज की प्रताड़ना का शिकार हैं। दलित समाज के हितों का ध्यान रखते हुए आरक्षण बिल पास कराइएं और इसे प्राइवेट क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करें।”

2. अशोक दोहरे, सांसद

– इटावा से दलित सांसद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीएम योगी और अन्य राज्याें में अपनी ही पार्टी की सरकारों पर एससी-एसटी के लोगों पर अत्याचार करने और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया।
– सांसद ने पत्र में लिखा, “2 अप्रैल को ‘भारत बंद’ के बाद एससी-एसटी के लोगों को उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में सरकारें और स्थानीय पुलिस झूठे मुकदमे में फंसा रही है उन पर अत्याचार हो रहा है। पुलिस निर्दोष लोगों को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए घरों से निकाल कर मारपीट कर रही है। अफसरों पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दें।”

3. छोटेलाल खरवार, सांसद

16 मार्च को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज से भाजपा सांसद छोटेलाल खरवार ने मोदी को लिखा, “मेरे घर पर जबरन कब्जा करके अधिकारियों ने उसे जंगल की मान्यता दे दी। जबकि, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दोबारा जांच हुई तो पता चला कि मेरा घर वन क्षेत्र में नहीं है। जिले के आला अधिकारी मेरा उत्पीड़न कर रहे हैं। दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की लेकिन सीएम ने डांटकर भगा दिया।”

– “अक्टूबर 2017 में मेरे भाई के खिलाफ सपा की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। वोटिंग के दौरान असलहों से लैस अपराधियों ने मेरी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर धमकी और दी गाली दी। उस समय अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। पार्टी के कुछ लोग मेरा टिकट काटने की साजिश भी रच सकते हैं।”

# यूपी के ये नेता भी भाजपा से नाराज

1. सावित्री बाई फुले, सांसद

बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने 31 मार्च को दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ काशीराम स्मृति उपवन में ‘भारतीय संविधान और आरक्षण बचाओ महारैली का आयोजन’ किया। उन्होंने अपनी ही सरकार और कुछ वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान दिया।

– इस दौरान कहा था, “केंद्र सरकार आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है। केंद्र सरकार की नीतियों के कारण एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक खतरे में हैं। भारतीय संविधान और आरक्षण भी खतरे में आ गया है।”

2. ओमप्रकाश राजभर, कैबिनेट मंत्री

 योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के चीफ ओमप्रकाश राजभर बीजेपी से नाराज चल रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अमित शाह से मुलाकात के बाद ही बीजेपी को वोट देने की बात कही थी। जिसके बाद शाह ने दिल्ली में राजभर से मुलाकात की थी।

– उन्होंने कहा था “हमारी पार्टी एनडीए का हिस्सा है, लेकिन बीजेपी गठबंधन धर्म का पालन नहीं कर रही। कई बार अमित शाह से बात करनी चाही, लेकिन वे वक्त नहीं दे रहे थे। मैं पहले दिन से सरकार से पिछड़े (राजभर, विंद, निषाद) वर्गों के लिए 27 परसेंट रिजर्वेशन मांग देने की मांग कर रहा हूं।”

यूपी में कितनी सुरक्षित सीटें

लोकसभा-17

विधानसभा-85

2014 लोकसभा चुनाव-भाजपा ने सभी 17 सीटें जीतीं

2017 विधानसभा चुनाव-भाजपा ने 69 सीटें जीतीं

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