Published On: Fri, Mar 30th, 2018

अमेरिका समेत 17 देशों ने रूस के 107 राजनयिक निकाले

यह दुनिया में फिर से शीतयुद्ध शुरू होने की आहट है। अमेरिका ने सोमवार को रूस के 60 राजनयिक निष्कासित कर दिए। इनमें से 12 संयुक्त राष्ट्र में तैनात हैं। इसके बाद जर्मनी, फ्रांस समेत 18 देशों ने भी रूस के 40 राजनयिकों को निकाल दिया है। ब्रिटेन पहले ही 23 रूसी राजनयिक निष्कासित कर चुका है। ब्रिटेन में पूर्व रूसी जासूस सर्गेई क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को जहर देकर मौत के घाट उतारने के मामले में रूस चौतरफा घिर गया है। इस मामले में कई देशों ने एक साथ रूस के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिका समेत 17 अन्य देशों ने रूस के 107 राजनयिकों को देश छोड़ने को कहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 60 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने के साथ-साथ जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, इटली, नीदरलैंड समेत 14 यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों ने कुल 30 रूसी राजनयिकों को निकालने के फैसले से एक भयंकर विवाद व तकरार आरंभ हो गया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने राजनयिकों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के कड़े संदेश दिए हैं। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहाöनाटो और ईयू देशों द्वारा हमारे राजनयिकों को निकालने के इस फैसले का हम विरोध व्यक्त करते हैं। हम इसके खिलाफ गैर-दोस्ताना कदम उठाने को विवश है। हम यह देख रहे हैं कि कुछ देश परिस्थितियों से वाकिफ हुए बिना हमारे खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। यह कदम संघर्ष बढ़ाएगा और टकराव की गतिविधियां बढ़ाएगा। मास्को ने यह भी कहा कि ब्रिटेन ने हम पर आधारहीन आरोप लगाए हैं। यह हमारे खिलाफ एक पूर्वाग्रह, पक्षपाती और दमनकारी कदम है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के राजनीतिक और आर्थिक हितों का टकराव शुरू हो गया और दोनों देशों के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ लग गई है। 1990 तक दुनिया के ज्यादातर देश दोनों महाशक्तियों के बीच बंटे रहे। सोवियत संघ के विखंडन के बाद जो शीत युद्ध खत्म हो गया था वह लगता है कि अब फिर शुरू हो रहा है। इस कार्रवाई के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक गंभीर राजनयिक संकट खड़ा हो गया है। रूस के खिलाफ ब्रिटेन के साथ यूरोपीय देशों और अमेरिका का आना जबरदस्त एकता का प्रदर्शन है। यह ऐसे समय हो रहा है जब ब्रैग्जिट के चलते ब्रिटेन और यूरोप में तनावपूर्ण संबंध हैं। 60 रूसी राजनयिकों को देश से निकालने का उद्देश्य भारत जैसे देश को कोई संदेश भेजना नहीं है, जिसके मास्को और वाशिंगटन के साथ समान रूप से मजबूत संबंध हैं।

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