Published On: Thu, Dec 28th, 2017

अध्यात्म के नाम पर यह अय्याशी के अड्डे

यह हमारे बाबाओं को क्या हो गया है? धर्म की आड़ में कुछ बाबा निर्दोष अनुयायियों का शोषण करने में लगे हुए हैं। अभी गुरमीत सिंह राम रहीम की अय्याशियों की दास्तान पुरानी भी नहीं पड़ी थी कि देश की राजधानी में एक और बाबा की काली करतूतों का पर्दाफाश हुआ है। रोहिणी के विजय विहार इलाके में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से आश्रम चलाने वाला वीरेंद्र देव दीक्षित खुद को कृष्ण बताता था। वह हमेशा महिला शिष्यों के बीच रहना पसंद करता था। वीरेंद्र ने 16 हजार महिलाओं के साथ संबंध बनाने का लक्ष्य रखा था। अध्यात्म की आड़ में वर्षों से चले आ रहे सेक्स रैकेट का खुलासा बेहद चौंकाने वाला है, जहां सैकड़ों लड़कियों और महिलाओं को बंधक बनाकर रखा गया था। हाई कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार देर रात आश्रम की जांच करने पहुंची महिला आयोग व दिल्ली पुलिस की टीम को मिले वीडियो में यह बात सामने आई। कार्रवाई में कई लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और दो कर्मियों को हिरासत में लिया गया। संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय लोगों के विरोध तथा शिकायत के बावजूद दिल्ली में अब तक यह आश्रम बगैर रोक-टोक चलता रहा, तो कल्पना की जा सकती है कि देश के दूरस्थ इलाकों में क्या स्थिति होगी। सेक्स रैकेट का यह तंत्र आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम से चल रहा था जिसमें धार्मिक पुस्तकों की बजाय अश्लील किताबें व पत्र, दवा और सीरिंज मिले। धर्म की आड़ में महिलाओं के शोषण के किस्से बार-बार सामने आते हैं। इस मामले में यह भी साफ है कि ज्यादातर गरीब और अशिक्षित महिलाओं को आस्था के नाम पर बरगलाया गया, एकाधिक पुलिस वालों की बेटियां और अमेरिका में पीएचडी कर लौटी एक लड़की तक का इस आश्रम में फंस जाना धर्म से जुड़ी हमारी अधकचरी सोच का ही नतीजा है, जिसका गलत फायदा राम रहीम और वीरेंद्र देव दीक्षित जैसे लोग उठाते हैं। पुलिस टीम को मिले वीडियो से सामने आया कि वीरेंद्र खुद को कृष्ण बताता और गोपियां बनाने के लिए अनुयायी लड़कियों को संबंध बनाने के लिए आकर्षित करता। आश्रम में लड़कियों को पांच दिन तक एक कमरे में बंद रखा जाता था। इसके बाद बाबा का वीडियो दिखाकर उनका ब्रेन वाश किया जाता। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने बताया कि महिलाओं को नशे की दवा दी जाती थी। स्वाति ने महिलाओं से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह दीक्षा ले रही हैं, लेकिन वहां कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं मिला। चार मंजिला आश्रम के अंदर बोर्ड पर लिखा थाöआपसे कोई पूछे कैसे हो तो कहना ठीक हैं और खुश हैं। पड़ोसियों ने कहाöरात में लड़कियां यहां से आती-जाती हैं। यहां देह व्यापार चलता है। उम्र ज्यादा होने के बाद महिलाओं को बाहर निकाल दिया जाता है। विभिन्न राज्यों की लड़कियां यहां रहती हैं। इनमें प्रमुख रूप से उड़ीसा, बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, यूपी और राजस्थान आदि हैं। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब राजस्थान की महिला वीरेंद्र देव के आश्रम में अनुयायी बनकर रह चुकी थी। उसने अपनी चारों बेटियों को भक्ति के लिए छोड़ा था, जिसमें एक नाबालिग है। उसने मां को बताया कि बाबा ने उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला और उसके पति ने बाबा पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। बाद में पूरा मामला सामने आ गया। बाबा पर दुष्कर्म सहित कई धाराओं में 11 मामले दर्ज हैं। पुलिस इन सभी की जांच कर रही है। वीरेंद्र देव दीक्षित पर दिल्ली हाई कोर्ट ने शिकंजा कस दिया है। अदालत ने आश्रम की आठ अन्य शाखाओं की जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि आश्रम के संस्थापक वीरेंद्र देव दीक्षित को पकड़कर चार जनवरी तक अदालत में पेश करें। हाई कोर्ट के समक्ष बृहस्पतिवार को 168 फंसी महिलाओं व लड़कियों की सूची पेश की गई जो आश्रम में कथित रूप से बंधक हैं। हाई कोर्ट ने पूछाöकहां छिपा है बाबा वीरेंद्र दीक्षित? कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने पूछा कि आश्रम के संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख सच्चे हैं तो वह पेश क्यों नहीं हो रहे। वह कहां हैं? यह महज संयोग नहीं है कि 21वीं सदी के इस विकसित दौर में धर्म के नाम पर ठगने वाले लोगों की दुकानें भी उसी जोरशोर से चल रही हैं। हम आस्था और अध्यात्म की तो बात करते हैं, लेकिन इस पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं समझते कि देश की बड़ी आबादी आज भी धर्म के नाम पर ठगी का शिकार क्यों बन रही है? पिछले कुछ समय से इन बाबाओं की काली करतूतों का पर्दाफाश हो रहा है और यह अच्छी बात है कि भोलीभाली जनता को धर्म के नाम पर इस तरह गुमराह करके अपनी निजी अय्याशी का शिकार बनाने वाले इन ढोंगी बाबाओं का पर्दाफाश हो रहा है और उम्मीद की जाती है कि हमारी भोलीभाली जनता इनके शिकंजे में फंसने से बचेगी।

Leave a comment

XHTML: You can use these html tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

%d bloggers like this: